Mohla-Manpur. मोहला-मानपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन के अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय तक चली जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने नम्रता सिंह जैन के गोंड अनुसूचित जनजाति के दावे को सही मान लिया है। समिति के इस फैसले के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लगने की स्थिति बन गई है। जांच समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर उनके जाति दावे को स्वीकार किया है।

जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे थे सवाल
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था। शिकायतकर्ताओं ने उनके ST प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी। शिकायतों में उनके दस्तावेजों, पारिवारिक पृष्ठभूमि और स्थानीय रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई थी। इसके बाद मामला उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के पास पहुंचा, जहां पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की गई।

दस्तावेजों और रिकॉर्ड की हुई जांच
उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान सरकारी रिकॉर्ड, जाति संबंधी दस्तावेज और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की समीक्षा की गई। समिति ने सभी तथ्यों की जांच के बाद नम्रता सिंह जैन के गोंड अनुसूचित जनजाति के दावे को सही पाया।

19 अगस्त को जारी हुआ आदेश
समिति की ओर से 19 अगस्त को जारी आदेश में नम्रता सिंह जैन के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता को मान्य किया गया है। आदेश में जांच के दौरान मिले रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर उनके ST दावे को स्वीकार करने की बात कही गई है। इस फैसले के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन को बड़ी राहत मिली है। अब उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रही कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया समाप्त होने की दिशा में आगे बढ़ गई है।

जांच पूरी होने तक प्रमाण पत्र नहीं हुआ था रद्द
इस मामले को लेकर पहले भी रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि जांच पूरी होने तक नम्रता सिंह जैन को दोषी नहीं माना गया था। साथ ही उनका जाति प्रमाण पत्र भी रद्द नहीं किया गया था। अब उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जांच प्रक्रिया में उनके पक्ष में फैसला आया है और उनका गोंड ST जाति दावा सही पाया गया है।

चुनाव के बाद शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार, चुनाव के बाद नम्रता सिंह जैन के जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतकर्ताओं ने प्रमाण पत्र की जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू की गई और मामला उच्च स्तरीय समिति तक पहुंचा। काफी समय तक चली जांच के बाद समिति ने सभी पहलुओं की समीक्षा करते हुए अपना निर्णय सुनाया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में चल रही चर्चाओं पर भी अब विराम लगने की उम्मीद है। उच्च स्तरीय समिति के निर्णय के बाद नम्रता सिंह जैन का गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र वैध माना गया है। यह फैसला उनके लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
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