GST का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, टैक्स चोरी का मास्टरमाइंड अमन सिंह गिरफ्तार

छग

Update: 2026-03-14 16:13 GMT
जनता से रिश्ता की खबर का असर, हमारी खबर सच निकली
विगत 13 वर्षों से जनता से रिश्ता ने लगातार किए कई बड़े खुलासे
जनता से रिश्ता की खबर सच हुई, अमन सिंह GST फर्जीवाड़े में गिरफ्तार
जनता से रिश्ता ने पहले किया था खुलासा, DGGI ने अमन सिंह को दबोचा
रायपुर में GST घोटाला पकड़ा गया, जनता से रिश्ता की जांच ने राह दिखाई
जनता से रिश्ता ने पहले ही बताया था, DGGI ने फर्जीवाड़ा उजागर किया

Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग की
खुफिया इकाई डायरेक्टरेट
जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने कर चोरी के एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इस मामले में विभाग ने मुख्य आरोपी अमन सिंह को गिरफ्तार किया है, जिस पर करीब 12.5 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने का आरोप है। जानकारी के अनुसार, आरोपी रायपुर के कबीर नगर का निवासी है और लंबे समय से जीएसटी विभाग की नजर में था। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अमन सिंह काफी समय से फरार चल रहा था और जांच एजेंसी द्वारा जारी किए गए कई समन के बावजूद वह पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हो रहा था। हालांकि तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के बाद आखिरकार 14 मार्च को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने ‘हिंदुस्तान कॉरपोरेशन’ (M/s Hindustan Corporation) नाम से एक फर्जी फर्म बना रखी थी। जब DGGI की टीम ने आरोपी द्वारा घोषित व्यावसायिक पते की जांच की, तो पता चला कि उस स्थान पर फर्म का कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। यानी यह पूरी कंपनी केवल कागजों पर ही संचालित की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार आरोपी का मुख्य काम बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस (बिल) जारी करना था। इन फर्जी बिलों के माध्यम से उसने कई कंपनियों को गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ दिलाया। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

विभाग का अनुमान है कि इस पूरे फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को लगभग 12.5 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। इस तरह के फर्जी ITC नेटवर्क के जरिए कई लाभार्थी कंपनियां भी टैक्स चोरी में शामिल हो सकती हैं, जिनकी पहचान करने के लिए अब विभाग द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी अमन सिंह पिछले लगभग एक साल से फरार था। इस दौरान उसने जांच अधिकारियों द्वारा जारी किए गए समन का भी पालन नहीं किया और लगातार जांच से बचने की कोशिश करता रहा। लेकिन
DGGI की टीम
ने तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और निगरानी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रायपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

DGGI की टीम अब इस मामले में जुड़े अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। विभाग का मुख्य उद्देश्य उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करना है, जिन्होंने इस फर्जी ITC नेटवर्क का लाभ उठाया। जांच के बाद ऐसे सभी लाभार्थियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फर्जी इनवॉइस और ITC क्लेम के माध्यम से होने वाली टैक्स चोरी देश के राजस्व के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से न केवल टैक्स चोरी पर अंकुश लगाया जा सकता है, बल्कि
ईमानदार करदाताओं
के हितों की भी रक्षा की जा सकती है। GST विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी और फर्जी बिलिंग के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग तकनीकी जांच, डेटा विश्लेषण और निगरानी के जरिए ऐसे नेटवर्क का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद टैक्स चोरी की वास्तविक सीमा का पता चल सकेगा और पूरे नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जाएगी।
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