Baloda Bazar. बलौदाबाजार। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम में लापरवाही के मामले में न्यू इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए परिवादी को कुल 25 लाख 32 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें 25 लाख रुपये बीमा क्षतिपूर्ति राशि, 25 हजार रुपये मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति तथा 7 हजार रुपये वाद-व्यय शामिल है। मामला बलौदाबाजार निवासी एवं मेसर्स फ्रेंड्स फूड्स के प्रोपराइटर वेदप्रकाश पारवानी से जुड़ा है। उन्होंने अपनी फर्म का बीमा न्यू इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी, अंबेडकर चौक बलौदाबाजार से कराया था। बीमा अवधि के दौरान भारी बारिश और बाढ़ के कारण उनके संस्थान में पानी घुस गया, जिससे लगभग 25 लाख रुपये की क्षति हुई।
घटना के बाद परिवादी ने बीमा कंपनी को सूचना दी और क्लेम प्रक्रिया के तहत सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर भी जरूरी कागजात कंपनी के पास जमा किए गए, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया। लगातार अनदेखी और भुगतान में देरी से परेशान होकर परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार में की गई, जहां अध्यक्ष रंजना दत्ता, सदस्य हरजीत सिंह चांवला और शारदा सोनी की पीठ ने सभी दस्तावेजों और तथ्यों का गहन अध्ययन किया। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा न तो समय पर जांच की गई और न ही दावे के निपटारे की प्रक्रिया में गंभीरता दिखाई गई।
आयोग के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद भी बीमा कंपनी द्वारा नियमानुसार सर्वे और सत्यापन की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। न ही परिवादी के नोटिस का कोई संतोषजनक जवाब दिया गया। इसे उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन मानते हुए आयोग ने कंपनी की कार्यप्रणाली को सेवा में गंभीर कमी करार दिया। आदेश में कहा गया कि बीमा कंपनियों का दायित्व होता है कि वे समय पर दावों का निपटारा करें और उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न करें। इस मामले में कंपनी की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई, जिसके चलते आयोग ने सख्त निर्णय दिया।
इस फैसले के बाद उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है कि बीमा कंपनियां यदि दावों का निपटारा समय पर नहीं करतीं तो उपभोक्ता आयोग उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। यह निर्णय अन्य बीमा मामलों के लिए भी एक नजीर माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की जीत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से कंपनियों को अपनी क्लेम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज करनी होगी। फिलहाल आदेश के बाद संबंधित बीमा कंपनी को तय राशि का भुगतान करना अनिवार्य हो गया है। यदि कंपनी आदेश का पालन नहीं करती है तो आगे कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।