बृजमोहन अग्रवाल के दिवंगत पिताजी को महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि जी ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

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Update: 2025-05-27 17:26 GMT
New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। देश की राजधानी दिल्ली में एक भावुक और आध्यात्मिक क्षण तब देखने को मिला जब लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल के निवास पर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज ने पधार कर सांसद के दिवंगत पिताजी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह अवसर परिवार के लिए गहरे भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक बना।


स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और अपने दिव्य वचनों के माध्यम से उपस्थित जनों को जीवन, कर्म और आध्यात्मिक चेतना के गूढ़ अर्थ समझाए। उन्होंने कहा कि "सच्चा जीवन वही है जो दूसरों के लिए आदर्श बन जाए, और सच्ची मृत्यु वही है जो आने वाली पीढ़ियों को मार्ग दिखा जाए।"
आध्यात्मिक संबल बना यह अवसर
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वामी जी की उपस्थिति को "दिव्य संबल और आत्मीय स्नेह का प्रतीक" बताया। उन्होंने कहा, "महाराज श्री का यह आत्मीय स्नेह और दिव्य उपस्थिति हमारे परिवार के लिए एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रही है। उनका आशीर्वाद हमारे लिए अमूल्य धरोहर है।" उन्होंने भावुक स्वर में यह भी कहा कि उनके पूज्य पिताजी ने अपने जीवन में जिन उच्च मानवीय मूल्यों को अपनाया, वे आज भी समाज में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। स्वामी जी द्वारा अर्पित श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उनके कर्मों की गूंज कितने हृदयों तक पहुंची।
पिताजी के व्यक्तित्व की स्मृति में श्रद्धांजलि
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पिता की स्मृति में कहा कि, "पिताजी ने सादगी, सेवा और सत्य को जीवन का आधार बनाया। उन्होंने जीवन भर न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी विदाई हमारे लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन आज महाराज श्री जैसे संत की उपस्थिति से यह क्षति कुछ हद तक भरती हुई प्रतीत होती है।"
सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र के लोगों की उपस्थिति
इस श्रद्धांजलि सभा में कई गणमान्य नागरिक, आध्यात्मिक संत, समाजसेवी एवं राजनेता भी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और सांसद बृजमोहन अग्रवाल व उनके परिवार को संबल प्रदान किया। सभा का माहौल अत्यंत भावुक एवं आध्यात्मिक था। स्वामी बालकानंद गिरि जी के इस आध्यात्मिक श्रद्धांजलि ने यह साबित कर दिया कि एक व्यक्ति की पुण्य स्मृति को श्रद्धा से याद करने की संस्कृति भारत की गहराई में रची-बसी है। स्वामी जी ने यह भी कहा कि जब तक किसी व्यक्ति के कर्म जीवित रहते हैं, तब तक वह व्यक्ति समाज में जीवंत रहता है।
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