डी.पी. विप्र कॉलेज के खिलाफ जांच कार्रवाई रद्द, हाईकोर्ट ने आदेशों को बताया अस्पष्ट
छग
Bilaspur. बिलासपुर। डी.पी. विप्र कॉलेज प्रबंधन को कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फर्म्स एवं सोसायटी के सहायक पंजीयक द्वारा जारी जांच संबंधी आदेशों और नोटिसों को निरस्त कर दिया है। अदालत ने इन कार्रवाइयों को अस्पष्ट और बिना ठोस आधार के बताया है। यह मामला अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें कॉलेज प्रबंधन पर प्रवेश प्रक्रिया, कैश बुक एंट्री, फीस रसीदों और वेतन भुगतान में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर रजिस्ट्रार ने सहायक पंजीयक को निर्देश दिए थे कि 21 दिनों के भीतर जांच पूरी की जाए।
जांच प्रक्रिया के दौरान जारी आदेशों को कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि 23 फरवरी 2026 को जारी आदेश में आरोपों की स्पष्टता नहीं थी और न ही जांच की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय की गई थी। कोर्ट ने यह भी पाया कि जांच के दौरान 1971 से अब तक के बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था, जबकि मूल शिकायत में इतनी लंबी अवधि का कोई उल्लेख नहीं था। अदालत ने कहा कि जब आरोप ही स्पष्ट नहीं हैं और उनकी अवधि भी तय नहीं है, तो इस प्रकार की विस्तृत जांच का कोई औचित्य नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि प्रशासनिक जांच में पारदर्शिता और स्पष्टता आवश्यक है, ताकि संबंधित पक्षों को अनावश्यक परेशानी न हो। इसी आधार पर कोर्ट ने सहायक पंजीयक द्वारा जारी आदेशों को निरस्त कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रार को यह स्वतंत्रता है कि वे नियमों के अनुसार नया, स्पष्ट और विधिसम्मत आदेश जारी कर सकते हैं और आवश्यक होने पर जांच की प्रक्रिया फिर से शुरू कर सकते हैं। इस फैसले के बाद डी.पी. विप्र कॉलेज प्रबंधन को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना अभी बनी हुई है।