Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित सीजीएमएससी (CGMSC) घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन हाई-प्रोफाइल आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई राज्य की महत्वाकांक्षी और जनहित से जुड़ी “हमर लैब” योजना में हुए कथित घोटाले को लेकर की गई है, जिसमें शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचने का आरोप है। EOW-ACB ने ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 05/2025 के तहत 18 जनवरी को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की।
गिरफ्तार आरोपियों में रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, कंपनी के लाईजनर प्रिंस जैन और रायपुर स्थित श्री शारदा इंडस्ट्रीज के प्रोप्राइटर राकेश जैन शामिल हैं। इनमें प्रिंस जैन, CGMSC मामले के पहले से आरोपी शशांक चोपड़ा का जीजा बताया जा रहा है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। यह पूरा मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 120-बी (षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2) एवं 7(सी) के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपियों ने निविदा प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों और आपसी मिलीभगत के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
क्या है पूरा मामला
राज्य की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला अस्पतालों, एफआरयू, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्रों में “हमर लैब” योजना लागू की गई थी। इस योजना के तहत मेडिकल उपकरण, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की खरीदी के लिए CGMSC द्वारा निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। विवेचना में सामने आया है कि इस निविदा में मोक्षित कॉर्पोरेशन को पुल टेंडरिंग के जरिए फायदा पहुंचाया गया। रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. और शारदा इंडस्ट्रीज ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लेकर मोक्षित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया।
जांच में यह भी सामने आया कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के लिए फर्मों के बीच आपसी समन्वय और कार्टेलाइजेशन किया गया। निविदा में केवल तीन फर्में शॉर्टलिस्ट हुई थीं और इन्हीं तीनों के वित्तीय प्रस्ताव खोले गए। जांच एजेंसियों के अनुसार, तीनों फर्मों द्वारा टेंडर में उत्पाद, पैक-साइज़, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक ही पैटर्न में भरा गया। यहां तक कि जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों ने समान रूप से दर्शाया। दरों के कोटेशन में भी एक जैसा पैटर्न पाया गया, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित कॉर्पोरेशन, उसके बाद रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और फिर शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा भरी गई।
550 करोड़ के नुकसान का आरोप
EOW-ACB का आरोप है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की, जिससे शासकीय राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ। इस प्रक्रिया के जरिए शासन को करीब 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची है। गिरफ्तार आरोपियों को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। रिमांड अवधि के दौरान EOW-ACB आरोपियों से गहन पूछताछ कर घोटाले के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक, अन्य संलिप्त व्यक्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी। जांच एजेंसियों का कहना है कि जनहित से जुड़ी “हमर लैब” योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।