Dhamtari. धमतरी। जिले के ग्राम पोटियाडीह में कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। खेतीहर जमीन पर बड़े पैमाने पर प्लॉट काटे जाने और जमीन से लगे पानी निकासी नाले को कथित तौर पर पाट दिए जाने के कारण बारिश का पानी खेतों में जमा होने लगा है। इससे गांव के किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी फसल प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। समस्या के समाधान और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ भू-माफियाओं ने खेती योग्य जमीन खरीदकर वहां नियमों को दरकिनार करते हुए प्लाटिंग का काम शुरू किया है। किसानों के मुताबिक प्लॉट काटने के दौरान खेतों और आसपास के क्षेत्र से बारिश का पानी बाहर निकालने के लिए मौजूद निकासी नाले को भी मिट्टी डालकर या अन्य तरीके से बंद कर दिया गया। पहले बारिश का पानी इसी नाले के माध्यम से बाहर निकल जाता था, लेकिन निकासी मार्ग बाधित होने के बाद पानी का बहाव खेतों की ओर हो गया है।
किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कई खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहने की वजह से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं कराई गई तो किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। खेती पर निर्भर परिवारों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पोटियाडीह में की जा रही कथित अवैध प्लाटिंग की तत्काल जांच कराई जाए। इसके साथ ही यह भी जांच हो कि खेतीहर जमीन पर प्लॉट काटने के लिए संबंधित लोगों ने जरूरी अनुमति और दस्तावेज लिए हैं या नहीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती तो खेतों की पानी निकासी व्यवस्था इस तरह बाधित नहीं होती।
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने प्रशासन से पानी निकासी के पुराने रास्ते को तत्काल बहाल कराने की मांग की है, ताकि खेतों में जमा पानी बाहर निकल सके और फसल को बचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ शिकायत दर्ज करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मौके पर अधिकारियों की टीम भेजकर स्थिति का निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई नहीं की और पानी निकासी की व्यवस्था बहाल नहीं की, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती और किसानों की जमीन को सुरक्षित रखना है।
अब किसानों की शिकायत के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित अवैध प्लाटिंग की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था बहाल होने पर प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।