Raipur/Ambikapur. रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की सख्ती ने भ्रष्टाचारियों को बड़ा संदेश दिया है। अंबिकापुर पासपोर्ट सेवा केंद्र में पिछले वर्ष हज यात्रा पर जाने वाले ग्रामीणों से पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर रिश्वत मांगने के मामले में फंसे सहायक पासपोर्ट अधिकारी संकट मोचन राय को अदालत ने दोषी करार दिया है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अम्बिकापुर ने आरोपी को तीन वर्ष की कठोर कारावास और 5 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

कैसे उजागर हुआ भ्रष्टाचार का पूरा मामला?
मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम दोलंगी से जुड़ा है। यहां के निवासी इसरार हुसैन ने ACB अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके गांव के चार लोग और वे स्वयं हज यात्रा के लिए पासपोर्ट बनवाने पहुँचें थे। सभी ने 9 अप्रैल 2024 को ऑनलाइन आवेदन भरा था। 24 मई 2024 को अपॉइंटमेंट मिलने पर सभी लोग अम्बिकापुर स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र पहुंचे। यहां कनिष्ठ पासपोर्ट सहायक संकट मोचन राय ने सभी के दस्तावेजों में कथित त्रुटि बताते हुए सत्यापन के लिए 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। पीड़ितों ने रिश्वत देने की बजाय आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने का निर्णय लिया और उसी दिन ACB अंबिकापुर में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

ACB द्वारा शिकायत का सत्यापन और ट्रैप की तैयारी
ACB टीम ने शिकायत की प्राथमिक जांच की, जिसमें आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए। शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत की रकम कम करने का निवेदन किया गया, जिसके बाद आरोपी ने 10 हजार की बजाय 8 हजार रुपये में सौदा तय किया। इस पर ACB ने 30 मई 2024 को ट्रैप की योजना बनाई। जाल बिछाया गया और जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय 8 हजार रुपये आरोपी को सौंपे, टीम ने संकट मोचन राय को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के हाथों से रासायनिक परीक्षण में रिश्वत की पुष्टि भी हुई।

न्यायालय में पेश हुआ अभियोग पत्र, आज सुनाया गया फैसला
ACB ने सभी सबूतों और ट्रैप कार्रवाई की पूरी डायरी के साथ आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूर्ण होने के बाद 25 जुलाई 2024 को विशेष न्यायालय, अम्बिकापुर में अभियोग पत्र दाखिल किया गया। लंबी सुनवाई के बाद 29 नवंबर 2025 को विशेष न्यायालय ने आरोपी संकट मोचन राय को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को तीन वर्ष की कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। यह फैसला बताता है कि सरकारी सेवाओं में रिश्वतखोरी अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ACB की कार्रवाई से सरकारी विभागों में बढ़ी सख्ती
ACB की इस कार्रवाई से आम लोगों में विश्वास बढ़ा है कि शिकायत करने पर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं। वहीं सरकारी विभागों में भी यह संदेश गया है कि रिश्वत मांगने वालों पर अब तुरंत कार्रवाई होगी और ट्रैप में पकड़े जाने पर सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी। यह मामला उन तमाम लोगों के लिए भी मिसाल है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने में हिचकिचाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के पीड़ितों ने साहस दिखाते हुए शिकायत की और आज उसका परिणाम सामने है।
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