Ambikapur. अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित सिद्धार्थ हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक तीन वर्षीय मासूम को कथित तौर पर एक्सपायरी इंजेक्शन लगाए जाने का मामला सामने आया है। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने का आरोप परिजनों ने लगाया है। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान अस्पताल की फार्मेसी में तीन एक्सपायरी इंजेक्शन मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, तीन वर्षीय बच्चे का सिद्धार्थ हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान बच्चे को एक्सपायरी इंजेक्शन लगा दिया गया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। बच्चे की हालत गंभीर बनी होने की बात परिजनों की ओर से कही गई है। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर विभागीय टीम सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंची। टीम ने अस्पताल की फार्मेसी में मौजूद दवाइयों के स्टॉक की जांच की। इसके साथ ही मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों को भी खंगाला गया। जांच के दौरान टीम को तीन एक्सपायरी इंजेक्शन मिले। स्वास्थ्य विभाग ने इन इंजेक्शनों के सैंपल एकत्र कर लिए हैं, ताकि उनकी जांच की जा सके। जांच में मिले इंजेक्शनों में Amikacin 250 mg भी शामिल है। इस इंजेक्शन पर अप्रैल 2026 की एक्सपायरी डेट दर्ज है। ऐसे में सितंबर 2026 में भी इसका अस्पताल के स्टॉक में मौजूद मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की जांच पूरी होने से पहले यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बरामद एक्सपायरी इंजेक्शनों में से ही किसी इंजेक्शन का इस्तेमाल संबंधित मासूम के इलाज में किया गया था या नहीं।

सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को ने मामले में तत्काल जांच टीम भेजे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अस्पताल से मिले एक्सपायरी इंजेक्शनों के सैंपल एकत्र किए गए हैं। साथ ही संबंधित दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, घटना के बाद बच्चे के परिजन अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे बच्चे की जान के साथ लापरवाही की गई। परिजनों के मुताबिक, इंजेक्शन दिए जाने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ी है। परिवार मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अस्पताल की फार्मेसी में एक्सपायरी दवाओं के स्टॉक को लेकर उठ रहा है। यदि किसी इंजेक्शन की एक्सपायरी अप्रैल 2026 में हो चुकी थी तो वह सितंबर 2026 तक अस्पताल के स्टॉक में कैसे मौजूद रहा? क्या अस्पताल में दवाइयों की एक्सपायरी डेट की नियमित निगरानी की जा रही थी? क्या एक्सपायरी दवाओं को अलग कर नष्ट करने की प्रक्रिया का पालन किया गया? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बरामद दवाओं में से किसी इंजेक्शन का इस्तेमाल बच्चे के इलाज में किया गया? फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मासूम की तबीयत बिगड़ने के पीछे एक्सपायरी इंजेक्शन की भूमिका थी या नहीं और अस्पताल प्रबंधन की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Tags: