रायपुर। होली की बधाई देते हुए MP बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, फागुन की मादक बयार जब आँगन-आँगन उतरती है, तब प्रकृति स्वयं अबीर-गुलाल की चादर ओढ़ लेती है। होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, लोकगीतों और आत्मीय मिलन का पावन अवसर है। ढोलक की थाप पर गूंजते फाग और हँसी-ठिठोली से भरा हुड़दंग मन की दूरियों को पिघला देता है। इस दिन वैमनस्य की रेखाएँ धुल जाती हैं और संबंधों में स्नेह का नया रंग घुल जाता है। होली का उल्लास हमें स्मरण कराता है कि जीवन भी रंगों की तरह विविध, चंचल और आनंदमय है—बस उसे खुले मन से अपनाने की देर है।

पैतृक निवास रामसागर में श्रद्धा और आस्था के साथ होलिका दहन कर धर्म की अधर्म पर विजय के शाश्वत संदेश को स्मरण किया। इस पावन अवसर पर परिवारजनों, आत्मीयजनों एवं क्षेत्रवासियों के साथ उपस्थित होकर परंपराओं की उस गरिमा को अनुभव किया, जो पीढ़ियों से हमें जोड़ती आई है। अग्नि की पावन ज्वाला में नकारात्मकता, वैमनस्य और अहंकार का दहन कर समृद्धि, सद्भाव और नई ऊर्जा के संकल्प के साथ रंगोत्सव का स्वागत किया।

प्रभु से प्रार्थना है कि फागुन का यह उल्लास सभी के जीवन में सुख, शांति और नवआशा के रंग भर दे। शुभ होली!


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