बहुचर्चित अपराधी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

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Update: 2025-10-01 17:34 GMT
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में कई बहुचर्चित और संगीन मामलों के आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज सूदखोरी, हत्या के प्रयास और मारपीट जैसे संगीन मामलों में आरोपी फरार होने के कारण कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फरार हिस्ट्रीशीटर भाई – रोहित और वीरेन्द्र तोमर
पूरानी बस्ती, कोतवाली और तेलीबांधा थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में हिस्ट्रीशीटर भाई रोहित और वीरेन्द्र तोमर अब तक फरार हैं। यह दोनों सूदखोरी और धमकी के मामलों में कुख्यात हैं। पुलिस ने इन दोनों पर पाँच–पाँच हजार रुपए का इनाम घोषित किया है, लेकिन पिछले तीन महीनों में भी उनकी लोकेशन का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। जानकारी के मुताबिक, ये दोनों भाई लंबे समय से लोगों को ऊँचे ब्याज पर कर्ज देना और वसूली के नाम पर धमकी व मारपीट करना करते थे। शहर में चर्चा है कि जब आरोपी खुलेआम धमकियाँ दे रहे थे, तब पुलिस ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। अब फरार होने के बाद शहर के लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
फरार बाउंसर गैंग का सरगना – वसीम बाबू
राजधानी रायपुर के भावना नगर में हुए बलवे का मास्टरमाइंड वसीम बाबू भी पिछले ढाई महीनों से फरार है। उसके कई गुर्गे भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। खम्हारडीह थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में वसीम और उसके गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। पुलिस ने वसीम बाबू की फरारी में चालान पेश किया और उसका वकील कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करने का प्रयास किया, जिसे न्यायालय ने गंभीर प्रवृति के अपराध मानते हुए खारिज कर दिया। पुलिस का दावा है कि कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन शातिर आरोपी अभी भी पकड़ से दूर है।

डीडी नगर गैंग वार: तीन आरोपी फरार, पुलिस तलाश में
डीडी नगर इलाके में हाल ही में हुए गैंग वार मामले में तीन मुख्य आरोपी अब तक फरार हैं। पुलिस के अनुसार, गौरव हेपट, राजीक उर्फ नाना और शाहरुख उर्फ भंडार को अभी तक पकड़ने में सफलता नहीं मिली है। इस मामले में आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) लगाई गई है। जानकारी के मुताबिक, गौरव हेपट का मुख्य व्यवसाय जुआ है। उसका साथी शम्मी गवली, जो गौरव का गुर्गा है, दूध बेचने के आड़ में जुआ का काम संचालित करता है। पुलिस ने बताया कि इस गैंग की यह गतिविधियां इलाके में तनाव और असुरक्षा पैदा कर रही हैं। पुलिस ने मामले में तीन आरोपीयों की तलाश तेज कर दी है। आसपास के इलाके में लगातार पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी किसी भी समय पकड़ में आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल वे फरार हैं।



जूक क्लब मारपीट मामले के आरोपी – चंद्राकर बंधु
तीसरे बहुचर्चित मामले में जूक क्लब में कारोबारी अज्जू पांडे के साथ मारपीट करने वाले तीनों आरोपी – सौरभ चंद्राकर, पुलकित चंद्राकर और प्रखर चंद्राकर – अब भी फरार हैं। बताया जा रहा है कि पुलकित चंद्राकर ने ऑनलाइन जुए में जीत के 28 लाख रुपये लेने के लिए अज्जू पांडे से मारपीट करवाई थी। प्रखर चंद्राकर ने भिलाई में पुलिस पर फायरिंग करने वाली पिस्टल उपलब्ध करवाई थी, जिसके बाद वह गिरफ्तार हुआ था। मुकुल सोना, जो तपन सरकार का भतीजा है, भी कई अवैध गतिविधियों में शामिल है। इन तीनों के खिलाफ तेलीबांधा थाना में हत्या के प्रयास और मारपीट के मामले दर्ज हैं।
पुलिस की नाकामी पर उठे सवाल
राजधानी पुलिस ने इन मामलों में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का दावा किया है और खुद अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन फरार रहने वाले तोमर बंधु, वसीम बाबू और चंद्राकर बंधु जैसे शातिर अपराधियों की गिरफ्तारी न होना कई तरह की आशंकाएँ पैदा कर रहा है। शहरवासियों का कहना है कि अगर बड़े–बड़े संगीन मामलों के आरोपी इतने लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रह सकते हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा पर भरोसा कैसे किया जा सकता है। राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और लोगों में सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ गई है।
पुलिस का दावा और वास्तविकता
राजधानी पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार अभियान चला रही है और विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि शहर से लेकर अन्य राज्यों तक ऑनलाइन सट्टा और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक गिरफ्तारियों का आंकड़ा सीमित रहा है और कुछ बड़े और शातिर अपराधी अभी भी फरार हैं।
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