हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एस.एस. तिग्गा की पदोन्नति रद्द

छग

Update: 2026-01-16 16:36 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेल विभाग से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एस.एस. तिग्गा को दी गई उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) जेल पद की पदोन्नति को निरस्त करते हुए वरिष्ठ अधिकारी अमित शांडिल्य को पुनः डीआईजी जेल के पद पर नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सेवा नियमों और वरिष्ठता की अनदेखी को आधार बनाकर पारित किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि
डीआईजी
जेल पद के लिए तैयार की गई वरिष्ठता एवं पात्रता सूची में अमित शांडिल्य का नाम सबसे ऊपर था। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा वरिष्ठता नियमों की अवहेलना करते हुए एस.एस. तिग्गा को पदोन्नति दे दी गई। न्यायालय ने इसे न केवल नियमों के विरुद्ध बल्कि प्रशासनिक मनमानी करार दिया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया में न तो वरिष्ठता के सिद्धांतों का पालन किया गया और न ही लागू सेवा नियमों को ध्यान में रखा गया। कोर्ट के अनुसार, किसी भी विभाग में पदोन्नति का आधार स्पष्ट नियमों और वरिष्ठता पर होना चाहिए, न कि विवेकाधीन निर्णयों पर। गौरतलब है कि मार्च 2023 में तत्कालीन राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान एस.एस. तिग्गा को डीआईजी जेल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इस निर्णय से असंतुष्ट अमित शांडिल्य ने पहले विभागीय स्तर पर अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया।

याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने विभागीय रिकॉर्ड, वरिष्ठता सूची और पदोन्नति से संबंधित नियमों का बारीकी से अध्ययन किया। सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पदोन्नति नियमों के विपरीत की गई थी, जिसे बनाए रखना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एस.एस. तिग्गा की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और वरिष्ठता सूची के अनुसार अमित शांडिल्य को डीआईजी जेल के पद पर पुनः बहाल किया जाए। वर्तमान में अमित शांडिल्य
जेल मुख्यालय
में पदस्थ हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनसे प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, इस निर्णय के बाद जेल विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और अन्य पदोन्नतियों की भी समीक्षा की संभावना जताई जा रही है। हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में सेवा नियमों, वरिष्ठता और पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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