Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर एयरपोर्ट के हवाई सुविधा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं की सुनवाई को जुलाई के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार पर कार्यों में धीमी गति का आरोप लगाया और कहा कि एयरपोर्ट विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में देरी हो रही है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य सरकार निजी एयरलाइंस कंपनियों को आमंत्रित करने के लिए ओपन टेंडर प्रक्रिया अपनाने से बच रही है, जिससे बिलासपुर से हवाई सेवाओं का विस्तार प्रभावित हो रहा है। इसके विपरीत राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि वह एयरपोर्ट विकास कार्यों में प्रगति कर रही है और इस संबंध में अगस्त तक का समय चाहती है, ताकि ठोस प्रगति रिपोर्ट पेश की जा सके। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने शपथ पत्र का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि रनवे कारपेटिंग, बाउंड्री वॉल जैसे कई कार्य स्वीकृत हो चुके हैं और अब तक एयरपोर्ट विकास पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
नई उड़ानों के संबंध में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फिलहाल एलायंस एयर को सब्सिडी दे रही है, जबकि निजी एयरलाइंस कंपनियों को कोई आमंत्रण नहीं दिया गया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी एयरलाइंस यदि व्यावसायिक आधार पर उड़ान संचालन करना चाहें तो उन्हें कोई रोक नहीं है, लेकिन सब्सिडी केवल सरकारी एयरलाइंस को ही दी जा रही है। इस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने आपत्ति जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत ओपन टेंडर के जरिए सभी एयरलाइंस को अवसर दिया जाता है, इसलिए राज्य सरकार को भी यही प्रक्रिया अपनानी चाहिए। मामले में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा एयरपोर्ट की श्रेणी को लेकर उठा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि याचिकाओं में 4C श्रेणी के एयरपोर्ट निर्माण की मांग की गई है, जबकि वर्तमान में केवल 3C श्रेणी का एयरपोर्ट तैयार हुआ है।
उनका कहना था कि 4C एयरपोर्ट के लिए अब तक कोई ठोस स्वीकृति या कार्य शुरू नहीं हुआ है, इसलिए सुनवाई को इस स्तर पर समाप्त नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने प्रारंभ में यह तर्क दिया कि जनहित याचिकाओं का उद्देश्य पूरा हो चुका है और आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ताओं के विरोध के बाद सरकार ने कहा कि वह सुनवाई जारी रखने पर आपत्ति नहीं करेगी, बल्कि उसे अधिक समय दिया जाए ताकि वह प्रगति दिखा सके। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह तक के लिए टाल दी। साथ ही निर्देश दिया कि उस समय तक राज्य सरकार नए शपथ पत्र के साथ अब तक हुई प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करे। इस मामले में हाईकोर्ट पहले भी लगातार निगरानी करता रहा है और समय-समय पर निर्देश जारी करता आया है, जिसके चलते एयरपोर्ट से जुड़े कई कार्य पूरे हुए हैं। अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि राज्य सरकार एयरपोर्ट विस्तार और नई उड़ानों के मामले में कितनी प्रगति कर पाती है।