अभनपुर मॉब लिंचिंग मामले में हाईकोर्ट सख्त, SP-IG-DGP से जवाब मांगा

छग

Update: 2026-03-20 15:04 GMT
Raipur. रायपुर। अभनपुर क्षेत्र में 13 मार्च 2025 को हुए मॉब लिंचिंग मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है। अदालत ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए एसपी, आईजी और डीजीपी से विस्तृत जवाब मांगा है और मामले में की गई शुरुआती कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। जानकारी के अनुसार, 13 मार्च 2025 को ग्रामीणों की भीड़ ने तिलक साहू, उनके पिता अमर सिंह साहू और भाई नरेश साहू को बेरहमी से पीटा। आरोप है कि तीनों को अर्धनग्न कर गांव में घुमाया गया, उनके चेहरे पर कालिख पोती गई और उन्हें जूते की माला पहनाई गई। इतना ही नहीं, आरोपियों ने तीनों को गांव के चौराहे पर पूरी रात बंधक बनाकर रखा। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि इतने गंभीर अपराध में पुलिस द्वारा केवल मामूली मारपीट की धाराएं लगाना बेहद आपत्तिजनक है और यह घटना की गंभीरता को कमतर आंकने जैसा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। साथ ही, सभी आरोपियों के खिलाफ समुचित जांच कर चालान पेश करने का आदेश भी दिया गया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया कि मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए।

दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं और इन्हें किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस मामले में अदालत की सख्ती के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किए जाने के बाद अब जांच को तेज करने और प्रकरण में उचित धाराएं जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। घटना ने समाज में भीड़ हिंसा (
मॉब लिंचिंग
) और अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई आवश्यक है, ताकि समाज में कानून का भय बना रहे और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से यह संदेश साफ है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए न्यायपालिका पूरी तरह सजग है।
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