हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षिका की बर्खास्तगी रद्द की

छग

Update: 2026-07-13 14:39 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार नहीं बल्कि बालोद जिले के डौंडी-लोहारा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा सहायक शिक्षिका (पंचायत) तस्लीम बानो को सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि विभागीय कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और गलत नियमों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की गई। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद 7 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने 24 अगस्त 2021 को जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है।

2005 में हुई थी सहायक शिक्षिका के पद पर नियुक्ति
मामले के अनुसार, तस्लीम बानो की नियुक्ति वर्ष 2005 में शासकीय प्राथमिक शाला शिकारीटोला, जनपद पंचायत डौंडी-लोहारा, जिला बालोद में सहायक शिक्षिका (पंचायत) के पद पर हुई थी। वर्ष 2009 में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गई थीं। याचिका में बताया गया कि पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने 9 फरवरी 2015 को खंड शिक्षा अधिकारी के समक्ष अवैतनिक अवकाश के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद 4 नवंबर 2020 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र भी विभाग को सौंपा था। हालांकि विभाग ने उनके त्यागपत्र पर निर्णय लेने के बजाय उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी।

233 दिनों की अनुपस्थिति को बनाया गया आधार
विभागीय जांच में शिक्षिका की करीब 233 दिनों की अनुपस्थिति को आधार बनाया गया। जांच के बाद जनपद पंचायत डौंडी-लोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 24 अगस्त 2021 को उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए तस्लीम बानो ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने विभागीय कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताते हुए बर्खास्तगी आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

अधिवक्ता ने रखी नियमों के उल्लंघन की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने हाईकोर्ट के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि तस्लीम बानो एक नियमित कर्मचारी थीं और उनके विरुद्ध कार्रवाई छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के नियम 7 के तहत की जानी चाहिए थी। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए बिना कार्रवाई पूरी कर दी। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच तो शुरू की गई, लेकिन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि विभाग ने गलत नियमों का उपयोग करते हुए नियम 10 के तहत बर्खास्तगी का आदेश जारी किया, जबकि नियमित कर्मचारी के मामले में अलग प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।

हाईकोर्ट ने माना प्रक्रिया में हुई गलती
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं थी। अदालत ने पाया कि तस्लीम बानो नियमित कर्मचारी थीं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई करते समय उचित नियमों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते समय विभाग को निर्धारित नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है। बिना उचित अवसर दिए और गलत प्रावधानों के तहत की गई कार्रवाई टिकाऊ नहीं हो सकती।

बर्खास्तगी आदेश हुआ निरस्त
हाईकोर्ट ने जनपद पंचायत डौंडी-लोहारा के सीईओ द्वारा 24 अगस्त 2021 को जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले से तस्लीम बानो को बड़ी राहत मिली है। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्णय ने यह स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते समय विभागों को नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना होगा।
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