Bilaspur. बिलासपुर। झीरम घाटी नक्सली घटना की दोबारा जांच के लिए गठित नए जांच आयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने भाजपा नेता एवं पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक की जनहित याचिका पर सुनवाई को दो सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया है। यह मामला झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित नए आयोग की वैधता से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने झीरम घाटी नक्सली घटना की जांच के लिए एक नया जांच आयोग गठित किया था। इस आयोग के गठन के खिलाफ तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में नए जांच आयोग के गठन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कौशिक की ओर से तर्क दिया गया था कि झीरम घाटी घटना की जांच पहले ही एक जांच आयोग द्वारा की जा चुकी है। ऐसे में दोबारा जांच के लिए नया आयोग गठित करने की आवश्यकता नहीं है।
मामले में राज्य सरकार के साथ-साथ झीरम घाटी घटना से प्रभावित परिवारों की ओर से भी हस्तक्षेप याचिका दायर की गई थी। प्रभावित परिवारों की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने पक्ष रखते हुए धरमलाल कौशिक की याचिका का विरोध किया था। उनका तर्क था कि जांच आयोग अधिनियम के तहत राज्य अथवा केंद्र सरकार को जांच आयोग गठित करने का अधिकार प्राप्त है। हस्तक्षेप याचिका में यह भी कहा गया कि यदि सरकार पहले गठित किसी जांच आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है, तो कानून के तहत नया जांच आयोग गठित किया जा सकता है। इसी आधार पर नए आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध किया गया।
इस मामले में हाईकोर्ट की प्राथमिक सुनवाई के बाद धरमलाल कौशिक के पक्ष में अंतरिम रोक यानी स्टे लगाया गया था। इसके चलते नए जांच आयोग की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अब इस मामले में हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार है। गुरुवार को यह प्रकरण हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सेवानिवृत्त होने के दिन को देखते हुए खंडपीठ ने मामले की सुनवाई को दो सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया।
झीरम घाटी नक्सली हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। इस घटना में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षा जवानों समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। घटना की जांच को लेकर समय-समय पर अलग-अलग स्तर पर जांच और आयोग के गठन की मांग उठती रही है। नए जांच आयोग को लेकर दायर याचिका पर अब अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। उस दौरान हाईकोर्ट के समक्ष नए जांच आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिका, राज्य सरकार और प्रभावित परिवारों की ओर से पेश किए गए तर्क तथा पहले से लागू अंतरिम रोक से जुड़े पहलुओं पर आगे सुनवाई होने की संभावना है। मामले में हाईकोर्ट के अगले आदेश पर नए जांच आयोग की कार्यवाही की दिशा भी निर्भर करेगी।