Dantewada. दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर में प्राकृतिक पर्यटन को लेकर नई तस्वीर सामने आ रही है। कभी नक्सलवाद के प्रभाव के कारण जहां पर्यटकों की आवाजाही सीमित रहती थी, वहीं अबूझमाड़ के हांदावाड़ा जलप्रपात में प्रकृति प्रेमियों की दिलचस्पी बढ़ रही है। दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 40 से 50 किलोमीटर दूर स्थित इस जलप्रपात को बाहुबली जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है। यहां दूर-दराज के इलाकों और अलग-अलग राज्यों से पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक सुंदरता, ऊंची चट्टानों से गिरता पानी और आसपास का हरियाली से भरा नजारा लोगों को आकर्षित कर रहा है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, 31 मार्च के बाद से हांदावाड़ा आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले नक्सलवाद के कारण इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां सीमित थीं, लेकिन अब हालात में बदलाव के साथ लोग इस प्राकृतिक स्थल को देखने पहुंच रहे हैं।

300 से 350 फीट ऊंची चट्टानों से गिरता है पानी
हांदावाड़ा जलप्रपात की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक भव्यता है। यहां करीब 300 से 350 फीट ऊंची चट्टानों से गिरती पानी की धारा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है। आसपास फैले घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और चट्टानों के बीच से बहता पानी इस स्थान को खास बनाते हैं। जलप्रपात तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कुछ दूरी पैदल भी तय करनी पड़ती है। रास्ते की कठिनाई के बावजूद जब दूर से झरने का नजारा दिखाई देता है, तो पर्यटकों की थकान दूर हो जाती है। यही वजह है कि रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता पसंद करने वाले लोग यहां पहुंचने में रुचि दिखा रहे हैं।


पक्की सड़क के बाद पैदल तय करना पड़ता है रास्ता
हांदावाड़ा जलप्रपात तक पहुंचना अभी भी आसान नहीं है। दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए तुमरीगुंडा तक पक्की सड़क उपलब्ध है। इसके आगे कच्चे रास्ते से होते हुए हांदावाड़ा गांव पहुंचना पड़ता है। गांव से जलप्रपात तक लगभग 3 से 4 किलोमीटर का सफर पगडंडी के रास्ते तय करना होता है। इस दौरान पर्यटकों को जंगल और प्राकृतिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। दुर्गम रास्ता होने के कारण यहां पहुंचने के लिए शारीरिक तैयारी और सावधानी जरूरी है।

नक्सलवाद का असर कम होने से पर्यटन को बढ़ावा
पहले नक्सलवाद के प्रभाव के कारण इस इलाके में पर्यटकों की आवाजाही काफी सीमित रहती थी। सुरक्षा संबंधी चिंताओं और दुर्गम रास्तों के कारण बहुत कम लोग यहां पहुंच पाते थे। अब क्षेत्र में परिस्थितियों में बदलाव के साथ प्रकृति प्रेमियों की आवाजाही बढ़ने की जानकारी सामने आ रही है। हांदावाड़ा जलप्रपात की बढ़ती लोकप्रियता से स्थानीय पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। यदि यहां पहुंचने के रास्ते, सुरक्षा और पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाता है, तो यह स्थान बस्तर के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र
हांदावाड़ा जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण अलग पहचान रखता है। यहां पहुंचने वाले पर्यटक झरने के मनमोहक दृश्य को करीब से देखने के लिए पैदल यात्रा करते हैं। हालांकि, पर्यटकों को जंगल के रास्तों, फिसलन भरी चट्टानों और जलप्रपात के आसपास विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण स्थानीय प्रशासन की सलाह लेकर यात्रा करना भी जरूरी है। दक्षिण बस्तर में पर्यटन की बढ़ती गतिविधियां इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को पहचान दिलाने का अवसर हैं। अब जरूरत है कि सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस खूबसूरत स्थल तक पहुंचने की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।
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