Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में दवा कारोबारियों की जीएसटी लंबित मामलों और डिमांड नोटिस से जुड़ी संवेदनशील लिस्ट के लीक होने से व्यापारियों में हड़कंप मच गया। इस लिस्ट में फर्मों के नाम के साथ बकाया राशि भी शामिल होने से मामला और गंभीर हो गया है। जानकारी के अनुसार, यह लिस्ट मूल रूप से पर्सनल ग्रुप में शेयर की गई थी, ताकि संबंधित व्यापारियों को उनके लंबित जीएसटी मामलों के बारे में जागरूक किया जा सके। हालांकि, लिस्ट किसी कारणवश बाहर वायरल हो गई। इससे व्यापारियों में चिंता और नाराजगी बढ़ गई। कई कारोबारी इसे गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने का गंभीर मामला मान रहे हैं।

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व्यापारियों का कहना है कि जब लंबित बकाया और केस से जुड़ी जानकारी खुले में आती है, तो इससे न केवल उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है, बल्कि बिना जांच और सुने ही दोषी जैसा माहौल बन जाता है। कुछ व्यापारियों ने इसे जीएसटी विभाग की ओर से अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति भी बताया। उनका कहना है कि इस तरह की जानकारी व्यक्तिगत रूप से संबंधित फर्मों को भेजी जानी चाहिए थी। रायपुर मेडिकल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष संजय रावत ने बताया कि यह लिस्ट संगठन के आंतरिक ग्रुप में
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को अलर्ट करने के लिए डाली गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि अमाउंट जैसी संवेदनशील जानकारी हटानी थी, लेकिन गलती से बिना संपादन के ही पोस्ट कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जीएसटी से जुड़े नोटिस सीधे ई-मेल पर आते हैं, और अक्सर वकीलों के पास भेजे जाते हैं, जिससे व्यापारियों को समय पर जानकारी नहीं मिल पाती। कई मामलों में थर्ड पार्टी आदेश भी जारी हो जाते हैं और अपील का समय निकल जाता है। इसलिए, समय रहते मामले की जानकारी साझा करने के उद्देश्य से यह लिस्ट तैयार की गई थी।
छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि रायपुर मेडिकल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष संजय रावत किसी कार्य के लिए जीएसटी कार्यालय गए थे, जहां अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल व्यापारियों के कई केस पेंडिंग हैं। इसके बाद उन्होंने मेडिकल कॉम्प्लेक्स से संबंधित व्यापारियों की लिस्ट मांगी, जो अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई। चैंबर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह लिस्ट किसी सरकारी विभाग द्वारा लीक नहीं की गई। यह केवल आंतरिक ग्रुप में साझा की गई थी। उन्होंने कहा कि लिस्ट के वायरल होने की घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच की जा रही है।
व्यापारियों की चिंता मुख्य रूप से इस बात पर है कि लंबित जीएसटी मामलों की जानकारी लीक होने से आर्थिक दबाव और कानूनी जोखिम बढ़ सकता है। इससे न केवल व्यापारिक छवि प्रभावित होती है, बल्कि व्यापारियों में डर और अनिश्चितता भी पैदा हो जाती है। चैंबर ने सभी व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने लंबित जीएसटी मामलों को गंभीरता से लें और समय पर सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में संपर्क करके स्पष्टीकरण और अनुपालन सुनिश्चित करें। इससे भविष्य में कानूनी कार्रवाई और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकेगा। इस घटना ने राज्य के दवा व्यापारियों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है। व्यापारियों का कहना है कि ऐसी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने और केवल जरूरतमंद व्यापारियों तक ही पहुँचाने की आवश्यकता है। वहीं, प्रशासन और व्यापारिक संगठन भी इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, डिजिटल माध्यमों पर साझा की गई यह लिस्ट लीक होने से अविश्वास और अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है। इसके अलावा, व्यापारिक समुदाय में अफवाहें और गलत समझ बनाने वाली जानकारी भी फैल सकती है।
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