खारून नदी में धड़ल्ले से हो रहा गणेश प्रतिमाओं का सीधा विसर्जन

छग

Update: 2025-09-06 13:29 GMT
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर शासन-प्रशासन की तैयारियों और दावों की पोल खुल गई है। पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण रोकने के लिए शासन ने विसर्जन कुंड बनाने के आदेश दिए थे, ताकि खारून नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। गणेश विसर्जन के दौरान लोग हजारों की संख्या में सीधे खारून नदी पहुंच रहे हैं और प्रतिमाओं का सीधा विसर्जन कर रहे हैं। खासतौर पर भाठागांव एनिकट क्षेत्र में सैकड़ों-हजारों की भीड़ जमा हुई और प्रशासन के सभी दावे धरे रह गए।
विसर्जन कुंड का नहीं हो रहा उपयोग
प्रशासन और नगर निगम की ओर से दावा किया गया था कि शहरभर में विभिन्न जगहों पर कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाए गए हैं। लेकिन लोगों ने इन कुंडों की बजाय सीधे नदी का रुख किया। इसका कारण या तो कुंडों की सही व्यवस्था न होना है या फिर प्रशासन की ओर से सख्ती न बरतना। परिणामस्वरूप खारून नदी में भारी मात्रा में प्रतिमाओं का सीधा विसर्जन हो रहा है, जिससे पानी के प्रदूषित होने का खतरा और बढ़ गया है।
सुरक्षा व्यवस्था भी नदारद
सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि विसर्जन स्थल पर न तो पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था और न ही गोताखोरों की तैनाती की गई थी। हजारों की संख्या में लोग नदी किनारे जमा हो गए, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था। अंधेरे के बीच बिना सुरक्षा उपायों के लोग नदी में उतरकर प्रतिमाएं विसर्जित करते रहे। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही।
पर्यावरण को खतरा
पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रतिमाओं में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टर ऑफ पेरिस, रंग और केमिकल नदी के पानी को प्रदूषित करते हैं। इससे जलीय जीव-जंतुओं और आसपास के लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। शासन द्वारा बार-बार अपील की जाती रही है कि लोग इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का उपयोग करें और कृत्रिम कुंडों में ही विसर्जन करें, लेकिन जब प्रशासन ही अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम हो जाए तो ऐसे प्रयास विफल हो जाते हैं।
प्रशासन मौन, जनता परेशान
स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल प्रशासन सिर्फ कागजों में तैयारी दिखाता है, लेकिन मौके पर व्यवस्था नहीं होती। इस बार भी यही हाल रहा। नदी किनारे अव्यवस्था का आलम रहा और लोग अपनी जान जोखिम में डालकर अंधेरे में प्रतिमाओं का विसर्जन करते रहे। लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि समय रहते कृत्रिम कुंडों को आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाता, ताकि लोग उनका उपयोग करते। इसके अलावा पुलिस बल और निगम कर्मचारियों की तैनाती जरूरी थी, जो कि नजर नहीं आई।
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