गणेश बैगा को सिंगलटोला हत्या मामले में मिली आजीवन कारावास की सजा

छग

Update: 2025-10-19 18:38 GMT
Gaurela-Pendra-Marwahi. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सिंगलटोला में हुए हत्या मामले में अदालत ने आरोपी गणेश उर्फ गन्ने बैगा को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर 2000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अर्थदंड जमा नहीं किया गया तो आरोपी को अतिरिक्त तीन माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। यह घटना 30 अगस्त 2023 की शाम लगभग 6 बजे हुई थी। आरोपी गणेश अपनी बहन से किसी विवाद में उलझा हुआ था। इस दौरान पड़ोसी विजय बैगा बीच-बचाव करने पहुंचे। गुस्से में आरोपी ने पास रखे बकरे काटने वाले चाकू से विजय के पेट पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

बीच-बचाव करने आए अजय बैगा पर भी आरोपी ने चाकू से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद परिजन दोनों को जिला अस्पताल गौरेला ले गए, जहां डॉक्टरों ने विजय बैगा को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल अजय बैगा का इलाज अस्पताल में जारी रहा। घटना की सूचना मिलने पर गौरेला पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी गणेश बैगा के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और गवाहों के बयान दर्ज किए। सुनवाई के दौरान अभियोग पक्ष ने ठोस सबूत और गवाहों के बयान पेश किए। अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने पैरवी की। गवाहों ने बताया कि आरोपी ने चाकू से हमला जानबूझकर किया और उसने अपनी बहन से विवाद के दौरान हिंसक रुख अपनाया।

अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और पुलिस रपट के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने कहा कि इस तरह की हिंसा समाज के लिए खतरा है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास और 2000 रुपये अर्थदंड सुनाया। आरोपी की ओर से कोई भी न्यायिक बचाव पर्याप्त नहीं माना गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अर्थदंड जमा नहीं किया गया तो उसे अतिरिक्त तीन माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। घटना और सजा की जानकारी मिलने के बाद ग्राम सिंगलटोला में शांति का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोग अदालत के फैसले से संतुष्ट दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि न्याय के इस कदम से भविष्य में ऐसे हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगेगा। यह घटना एक बार फिर समाज को याद दिलाती है कि गुस्से और विवाद का हिंसक समाधान केवल जीवन और सामाजिक शांति के लिए खतरा है। गौरेला पुलिस और न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी को उसके अपराध की उचित सजा मिले।
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