पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के खासम-खास डॉ. अजय शंकर कनौजे के भ्रष्टाचार का नया कारनामा

Update: 2026-03-23 06:55 GMT
स्वास्थ्य विभाग में राज्योत्सव घोटाला: बिना टेंडर पसंदीदा फर्म स्वाति मैनेजमेंट को दिया 58 लाख का काम
डॉ. अजय कनौजे भूपेश सरकार हो या कोई और सरकार अपनी चेहती फर्म स्वाति मैनेजमेंट को नियम विरुद्ध 58 लाख का कार्य दिया, किया दावा
पूर्व में भी गुटखा प्रकरण में घपले घोटाले के आरोपी है कनौजे
झोलाछाप डाक्टर पकड़ों अभियान में भी डॉ शंकर कनौजे ने भी 2021 से 23 तक मनमाना पैसा वसूला
RTI कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने किया बड़ा खुलासा स्वास्थ्य विभाग का खुला भ्रष्टाचार
स्वास्थ्य विभाग में कांग्रेस का सिस्टम चलाने वाले मास्टरमाइंड है कनौजे, कौन और कैसे सबक सिखाएगा
डॉ. शंकर कनौजे लगातार पदोन्नति मिलती रही, बिना नियुक्तिपत्र के 27 जिलों के तीन विभिन्न पोस्टों डिप्टी कमिश्नर के रूप में तैनात रहे
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 के आयोजन में स्वास्थ्य विभाग (हृ॥रू) द्वारा वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। सूचना के अधिकार (क्रञ्जढ्ढ) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरटीआई कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने खुलासा किया है कि विभाग के जि मेदार अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2024-25 को ताक पर रखकर अपनी पसंदीदा फर्म मेसर्स स्वातिस मैनेजमेंट को उपकृत करने के लिए बिना किसी निविदा (ञ्जद्गठ्ठस्रद्गह्म्) के करीब 59 लाख रुपये का कार्यादेश जारी कर दिया।
भंडार क्रय नियम की धारा 3.1.1 का खुला उल्लंघन : दस्तावेजों के अनुसार, राज्योत्सव में प्रदर्शनी स्टॉल निर्माण के लिए खुली निविदा आमंत्रित करना अनिवार्य था। लेकिन आई.ई.सी. (ढ्ढश्वष्ट) शाखा के उप संचालक डॉ. अजय शंकर कन्नौजे पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी कर सीधे स्वाति मैनेजमेंट को लाभ पहुँचाने के लिए फाइल दौड़ाई। आश्चर्य की बात यह है कि राज्योत्सव जैसा पूर्व-निर्धारित आयोजन होने के बावजूद अंतिम समय में तात्कालिकता का बहाना बनाकर टेंडर प्रक्रिया को रोका गया, जो सीधे तौर पर भंडार क्रय नियम की धारा 3.1.1 का उल्लंघन है।
शासकीय राशि का दुरुपयोग : आशीष देव सोनी द्वारा उजागर की गई नस्ती क्रमांक 145 से यह भी स्पष्ट होता है कि जिस राशि (स्नरूक्र ष्टशस्रद्ग 183.3) का उपयोग जनहित की स्वास्थ्य योजनाओं के लिए होना था, उसे नियम विरुद्ध तरीके से अस्थाई प्रदर्शनी में झोंक दिया गया। कुल 58,60,710/- का भुगतान जिस तेजी से किया गया और बाद में इसे विधिक जामा पहनाने के लिए कार्योत्तर स्वीकृति ली गई, वह विभागीय अधिकारियों और इस पसंदीदा फर्म के बीच गंभीर सांठ-गांठ की ओर इशारा करता है।
आरटीआई कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने इस पूरे मामले में डॉ. अजय शंकर कन्नौजे एवं अन्य संबंधितों के विरुद्ध आपराधिक कृत्य और शासकीय राशि के दुरुपयोग की जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
डॉ. अजय शंकर कन्नौजे से संबंधित कुछ प्रमुख विवाद और कानूनी मामले समय-समय पर चर्चा में रहे हैं। उनकी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति को लेकर नि नलिखित महत्वपूर्ण मामले सामने आए हैं: नियम विरुद्ध प्रभार और प्रतिनियुक्ति का मामला: वर्ष 2018-19 के दौरान यह मामला काफी चर्चा में था कि डॉ. अजय शंकर कन्नौजे को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बावजूद पद पर बनाए रखा गया था। उन पर आरोप था कि नियम विरुद्ध तरीके से उन्हें प्रदेश के सभी 27 जिलों का प्रभार (अभिहित अधिकारी के रूप में) दे दिया गया था, जबकि सामान्यत: एक अधिकारी के पास सीमित जिलों की जि मेदारी होती है।
यह स्पष्ट रूप से जनता के पैसे का आपराधिक दुरुपयोग है। जब नियम स्पष्ट हैं कि बिना टेंडर कोई कार्य नहीं होगा, तो फिर एक विशेष पसंदीदा फर्म पर इतनी मेहरबानी क्यों? साक्ष्यों के आधार पर इस गंभीर वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
-आशीष देव सोनी, आरटीआई कार्यकर्ता
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