तमनार हिंसा के बाद बड़ा फैसला, जिंदल पावर ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान की जनसुनवाई वापस ली
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Raigarh. रायगढ़। जिले के तमनार विकासखंड में जिंदल उद्योग को आबंटित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जनविरोध, धरना-प्रदर्शन, हिंसक झड़प, आगजनी और पुलिस कर्मियों पर हमले की घटनाओं के बाद जिंदल पावर लिमिटेड ने 8 दिसंबर 2025 को आयोजित जनसुनवाई को औपचारिक रूप से निरस्त करने का आवेदन प्रशासन को सौंप दिया है। इस फैसले से तमनार क्षेत्र में चल रहे आंदोलन और प्रशासनिक हलचल के बीच एक अहम बदलाव माना जा रहा है।
इस संबंध में जिंदल पावर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रदिप्ता कुमार मिश्रा ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि कंपनी ने स्थानीय ग्रामीणों की भावनाओं और मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए जनसुनवाई के आवेदन को वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने प्रशासन को लिखे गए पत्र की प्रति साझा करते हुए कहा कि जिंदल समूह हमेशा से स्थानीय समुदाय के साथ संवाद और सहमति के आधार पर काम करता आया है। एमडी प्रदिप्ता कुमार मिश्रा द्वारा लिखे गए पत्र में उल्लेख है कि गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान की 8 दिसंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र के लगभग सभी प्रभावित ग्रामों में असंतोष व्याप्त था। 12 दिसंबर से लगातार ग्रामीण धरना-प्रदर्शन कर रहे थे और जनसुनवाई को रद्द करने की मांग कर रहे थे। कंपनी के अनुसार, स्थिति 27 दिसंबर को उस समय पूरी तरह बेकाबू हो गई जब धरना स्थल के आसपास हिंसक झड़प, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
पत्र में यह भी बताया गया है कि हिंसा के दौरान पुलिस कर्मियों और जिंदल पावर के कर्मचारियों पर हमला किया गया, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इसके साथ ही कोल हैंडलिंग प्लांट में आगजनी की गई, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इन घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित किया, बल्कि क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल भी पैदा कर दिया। हिंसक घटनाओं के बाद रायगढ़ कलेक्टर द्वारा भी जनसुनवाई को निरस्त करने के संबंध में उच्च स्तर पर पत्राचार किया गया था। प्रशासन की ओर से हालात की गंभीरता को देखते हुए जनसुनवाई प्रक्रिया पर पुनर्विचार के संकेत दिए गए थे। इसी क्रम में जिंदल पावर प्रबंधन ने स्वेच्छा से जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने का निर्णय लिया।
प्रदिप्ता कुमार मिश्रा ने अपने बयान में कहा, “जिंदल समूह हमेशा से जनभावनाओं का सम्मान करता आया है। मौजूदा परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि स्थानीय समुदाय में इस परियोजना को लेकर गहरी आशंकाएं और विरोध है। जब तक ग्रामवासियों का विश्वास और समर्थन प्राप्त नहीं होगा, तब तक इस परियोजना को आगे बढ़ाने से संबंधित कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा।” गौरतलब है कि तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर लंबे समय से पर्यावरणीय प्रभाव, विस्थापन, आजीविका और स्थानीय संसाधनों पर पड़ने वाले असर को लेकर विरोध होता रहा है। जनसुनवाई को लेकर हुई हिंसा ने इस मुद्दे को राज्य स्तर पर सुर्खियों में ला दिया। घटना के बाद से क्षेत्र में अब भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। एहतियातन तमनार और आसपास के गांवों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है तथा लगातार गश्त की जा रही है।
प्रशासन की ओर से ग्रामीण प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर शांति बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रायगढ़ जिले में हुई हिंसक घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि चाहे उपद्रवी हों या लापरवाही बरतने वाले अधिकारी, दोषी पाए जाने पर सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिंदल पावर द्वारा जनसुनवाई वापस लेने के फैसले को जहां एक ओर ग्रामीण आंदोलन की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह मामला उद्योग, प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और कंपनी मिलकर इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान किस दिशा में करते हैं।