मछली व्यवसाय से राकेश धीवर के किस्मत की तस्वीर बदली

छग

Update: 2026-03-20 14:41 GMT
Mahasamund. महासमुंद। जिले के महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम तुमगांव के निवासी राकेश धीवर ने परंपरागत मछली व्यवसाय को आधुनिक तरीके से अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। मत्स्य विभाग की मोटर-साइकिल सह आइस बॉक्स योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राकेश धीवर एक साधारण परिवार से आते हैं, जहां मछली पालन पीढ़ियों से आजीविका का प्रमुख साधन रहा है। उनके पिता विश्राम धीवर प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति तुमगांव के सदस्य रहे हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर राकेश ने भी इस क्षेत्र में कदम रखा। आज यह कार्य उनके पूरे परिवार के सहयोग से संचालित हो रहा है और एक सशक्त पारिवारिक उद्यम का रूप ले चुका है।

मोटर-साइकिल और आइस बॉक्स मिलने से राकेश धीवर के व्यवसाय में बड़ा बदलाव आया है। अब वे दूर-दराज के गांवों और हाट-बाजारों तक आसानी से मछली पहुंचा पाते हैं। इससे न केवल उनके व्यापार का विस्तार हुआ है, बल्कि ग्राहकों तक ताजा मछली समय पर पहुंचाने में भी सुविधा हुई है। राकेश प्रतिदिन आसपास के तालाबों से मछलियां खरीदकर स्थानीय बाजारों में बिक्री करते हैं। वे रोजाना लगभग 2 क्विंटल मछली का व्यापार करते हैं। इस कार्य में प्रतिदिन करीब 20 हजार रुपए की लागत आती है, जबकि बिक्री से उन्हें लगभग 24 हजार रुपए तक की आय होती है। इस प्रकार उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 हजार रुपए का सकल लाभ प्राप्त होता है।

खर्चों और मजदूरी को निकालने के बाद राकेश धीवर को प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,500 रुपए तक की शुद्ध आय होती है। इस हिसाब से वे प्रतिमाह करीब 45 से 50 हजार रुपए तक की आमदनी अर्जित कर लेते हैं, जो उनके परिवार के लिए एक स्थायी आय का स्रोत बन चुकी है। उनके परिवार में पत्नी और दो पुत्र हैं, जो इस व्यवसाय में सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर मछली विक्रय कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे यह एक सफल पारिवारिक उद्यम बन गया है।

इसके अलावा राकेश धीवर अपने पैतृक खेत में कृषि कार्य भी करते हैं। मछली व्यवसाय और खेती के समन्वय से उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं। इस बहुआयामी आय प्रणाली ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना दिया है। राकेश धीवर का कहना है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलने पर ग्रामीण परिवार भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने मत्स्य विभाग और सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उन्हें आगे बढ़ने का नया अवसर दिया है। उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि अगर सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं तो पारंपरिक व्यवसाय भी आधुनिक तरीके से अपनाकर बेहतर आय का स्रोत बन सकते हैं। राकेश धीवर आज क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
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