Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में सफाई कर्मचारियों के भुगतान को लेकर विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। जोन-8 कमिश्नर की शिकायत पर कांग्रेस पार्षद संदीप साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि भुगतान से जुड़े मामले को लेकर फोन पर बातचीत के दौरान पार्षद ने जोन कमिश्नर के साथ कथित रूप से गाली-गलौज की और धमकी दी। मामला रायपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, जोन-8 कमिश्नर राजेश्वरी पटेल की शिकायत के आधार पर कांग्रेस पार्षद संदीप साहू के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, विवाद सफाई कर्मचारियों के भुगतान को लेकर शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि सफाई कर्मचारियों से जुड़े भुगतान मामले को लेकर पार्षद और जोन कमिश्नर के बीच बातचीत हुई थी। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और मामला शिकायत तक पहुंच गया। जोन कमिश्नर की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पार्षद ने फोन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और धमकी दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पार्षद ने आरोपों को बताया गलत
वहीं कांग्रेस पार्षद संदीप साहू ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि जोन-8 में कामकाज को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही हैं। पार्षद का आरोप है कि जोन-8 वसूली का केंद्र बन गया है और बिना कमीशन के काम नहीं होने की स्थिति बनी हुई है। संदीप साहू ने दावा किया कि कमीशन नहीं देने के कारण सफाई कर्मचारियों का भुगतान रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हित में आवाज उठाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पार्षद ने जोन कमिश्नर द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को झूठा और निराधार बताया है।

पुलिस कर रही मामले की जांच
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, बातचीत से जुड़े तथ्यों और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच करेगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले के सामने आने के बाद रायपुर के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्षद और नगर निगम अधिकारी के बीच हुए विवाद को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नगर निगम से जुड़े मामलों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भुगतान जैसे प्रशासनिक मुद्दे को लेकर विवाद का पुलिस तक पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी।
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