फाइनेंस कंपनी में करोड़ों की फर्जी ऋण घोटाले का खुलासा, पूर्व मैनेजर और दलाल गिरफ्तार
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Raigarh. रायगढ़। घरघोड़ा पुलिस ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए श्रीराम फाइनेंस कॉर्पोरेशन प्रा. लि. से जुड़ी करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला वर्ष 2017 से 2019 के बीच कंपनी की घरघोड़ा शाखा में हुआ, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों की राशि का ऋण स्वीकृत कराकर गबन किया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मामले की शिकायत श्रीराम फाइनेंस कॉर्पोरेशन प्रा. लि. रायपुर के लीगल डिपार्टमेंट मैनेजर राकेश तिवारी ने दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कंपनी की घरघोड़ा शाखा में कार्यरत वीरेन्द्र प्रताप पुरसेठ और अन्य दो कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से दलालों के जरिए 26 फर्जी ग्राहकों के नाम पर लगभग 1 करोड़ 30 लाख 50 हजार रुपए का व्यापार ऋण जारी कराया।
आरोपियों ने कंपनी को धोखे में रखकर कागजातों में हेराफेरी की। उन्होंने फर्जी व्यवसायिक संस्थान दिखाकर सत्यापन की औपचारिकता पूरी की और ऋण राशि अपने कब्जे में कर ली। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ग्राम बहिरकेला निवासी राजकुमार साहू ने चार काल्पनिक ग्राहकों के नाम पर 26 लाख रुपए का ऋण स्वयं लिया और इसके एवज में कंपनी कर्मचारियों को रिश्वत भी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध क्रमांक 297/2025 दर्ज किया, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 470, 471 और 120(बी) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक रायगढ़ के निर्देश पर थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपराध करना स्वीकार किया। इसके बाद मुख्य आरोपी वीरेन्द्र प्रताप पुरसेठ (उम्र 34 वर्ष, निवासी वार्ड 08 नावापारा, घरघोड़ा) और दलाल राजकुमार साहू (उम्र 44 वर्ष, निवासी ग्राम बहिरकेला) को हिरासत में लेकर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
पुलिस का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा एक संगठित वित्तीय अपराध का उदाहरण है, जिसमें बैंकिंग प्रणाली की आंतरिक खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों की राशि निकाली गई। इस घोटाले में और भी कई लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिनकी तलाश जारी है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों द्वारा ऋण स्वीकृति के नाम पर फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। उन्होंने ग्राहकों के नाम से नकली फर्म पंजीयन, दुकान किराया अनुबंध और झूठे आय प्रमाण पत्र बनाए थे। कंपनी के आंतरिक सत्यापन में भी इन दस्तावेजों को सही दिखाया गया, जिससे धोखाधड़ी संभव हुई।
इस पूरे मामले में पुलिस टीम में सहायक उपनिरीक्षक खेमराज पटेल, प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक, आरक्षक हरीश पटेल, उद्योराम पटेल, चंद्रशेखर चंद्राकर, प्रहलाद भगत, भानु चंद्रा और महिला आरक्षक सुप्रिया सिदार की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। यह भी आशंका है कि आरोपियों ने इस फर्जीवाड़े से प्राप्त राशि को रियल एस्टेट और निजी व्यवसायों में निवेश किया होगा। पुलिस वित्तीय ट्रांजैक्शन का बारीकी से विश्लेषण कर रही है और शेष आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की बात कही है।इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। वित्तीय संस्थानों को भी अब अपने दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा करने की सलाह दी गई है ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों की पुनरावृत्ति न हो सके।