छत्तीसगढ़ के डॉ. तपेश गुप्ता की मेहनत को राष्ट्रीय पहचान ‘गुरुविशिष्ट’ सम्मान से बढ़ा गौरव
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Raipur रायपुर: छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित “गुरुविशिष्ट” सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान दयानंद सागर प्रबंध संस्थान, बैंगलोर द्वारा प्रतिवर्ष देश के ख्यातिलब्ध प्राध्यापकों और शिक्षाविदों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए दिया जाता है। डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को यह सम्मान उनके उल्लेखनीय शोधपत्र लेखन, श्रेष्ठ शोध निर्देशन और गुणवत्तापूर्ण अध्यापन कार्य के लिए प्रदान किया गया है। उनका चयन उनके शोध पत्रों में उल्लेखित नाम के आधार पर किया गया। इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में भी खुशी का माहौल है।
डॉ. गुप्ता वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग में प्राचार्य सह अपर संचालक के पद पर कार्यरत हैं। वे मूल रूप से वाणिज्य विषय के प्राध्यापक हैं। इससे पहले वे छत्तीसगढ़ शासन में संयुक्त सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय योगदान दिया है। रायपुर से एमकॉम की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सूरत स्थित साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। अपने शैक्षणिक जीवन में उन्होंने विभिन्न संस्थानों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए हैं। अब तक वे करीब 488 व्याख्यान दे चुके हैं। डॉ. गुप्ता के शोध कार्यों की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है। उनके लगभग 106 शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के और 388 शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशित हो चुके हैं। वाणिज्य विषय में शोध निर्देशक के रूप में उन्होंने 16 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन दिया है, जबकि 76 शोध प्रबंधों का मूल्यांकन भी किया है।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ डॉ. गुप्ता लगातार शैक्षणिक लेखन और शोध कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनका शोधग्रंथ “Development of Tourism Industry and Marketing in India” जर्मनी की प्रतिष्ठित लैम्बर्ट एकेडमिक पब्लिशिंग द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित किया गया है। डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें आईसीजीबी-2013 (मिशिगन, अमेरिका) द्वारा “बेस्ट डॉक्टोरल थीसिस अवार्ड” दिया गया था। इसके अलावा इंडो-भूटान एजुकेशन कॉन्क्लेव, थिम्पू में “इनोवेटिव पेडागोजी और बेस्ट टीचिंग प्रैक्टिस के लिए वैल्यू विजन अवार्ड-2018” से सम्मानित किया गया।
साउथ एशिया मैनेजमेंट एसोसिएशन, सिंगापुर और जबलपुर मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा भी उन्हें “ओवरऑल आउटस्टैंडिंग रिसर्च वर्क अवार्ड” प्रदान किया जा चुका है। शिक्षा और शोध के अलावा डॉ. गुप्ता की रुचि फिलाटेली यानी डाक टिकट और मुद्रा संग्रहण में भी है। इस क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, यूनिवर्सल वर्ल्ड रिकॉर्ड फोरम और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
डॉ. गुप्ता पिछले दो दशक से अधिक समय तक राज्य के सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडीज के संयोजक और अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। शिक्षा व्यवस्था, शोध और प्रशासनिक नियमों के क्षेत्र में उनके अनुभव को विशेष पहचान मिली है। सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्य करने की अपनी अलग पहचान बनाई है। वे अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम और राज्य सिविल सेवा नियमों के संबंध में नियमित रूप से मार्गदर्शन भी देते हैं। डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को मिले इस सम्मान को शिक्षा और शोध क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।