पीएम किसान योजना के नाम पर साइबर ठगी, पुलिस ने बिहार से पकड़े तीन आरोपी

छग

Update: 2025-08-22 17:20 GMT
Balod. बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पुलिस ने साइबर अपराध के बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। प्रधानमंत्री किसान योजना के नाम पर फर्जी एप्लीकेशन बनाकर ठगी करने वाले इस गिरोह ने मोबाइल हैकिंग के जरिए लाखों रुपए हड़प लिए। पुलिस ने बिहार के जमुई जिले से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लंबे समय से सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से ग्रामीण और बुजुर्ग लोगों को अपना शिकार बना रहा था। गिरफ्तार आरोपियों से भारी मात्रा में नकदी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और एक लग्जरी कार जब्त की गई है।
बुजुर्ग से 12 लाख 13 हजार की ठगी
मामला डोंडिलोहरा थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाले दिलीप मेश्राम, जो कि भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से रिटायर्ड कर्मचारी हैं, इस ठगी के शिकार बने। आरोपियों ने उन्हें प्रधानमंत्री किसान योजना के लाभार्थियों के लिए बनाए गए फर्जी एप्लीकेशन के झांसे में फंसा लिया। ऐप डाउनलोड करने और फार्म भरने के दौरान उनका मोबाइल हैक हो गया। इसके बाद गिरोह ने उनका ई-सिम तैयार किया और ओटीपी के जरिए यूपीआई एप्स तक पहुंच बनाई। कुछ ही घंटों में बुजुर्ग के खाते से 12 लाख 13 हजार रुपए ट्रांसफर कर लिए गए।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल और डोंडिलोहरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई। तकनीकी जांच और बैंक खातों की ट्रांजेक्शन डिटेल से ठगों का लोकेशन बिहार के जमुई जिले में मिला। इसके बाद टीम को बिहार रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस और मुखबिरों की मदद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
नीतीश कुमार दास (जमुई, बिहार)
अरविंद कुमार दास (जमुई, बिहार)
राकेश कुमार दास (जमुई, बिहार)
ये तीनों आरोपी साइबर अपराध में लंबे समय से सक्रिय बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने जब्त किया
तीन मोबाइल फोन
एक लैपटॉप
चेकबुक और पासबुक
लगभग 15 लाख रुपए नकद
एक टॉप मॉडल हुंडई वेन्यू कार
पुलिस का मानना है कि बरामद नकदी और गाड़ी, इसी तरह की ठगी से अर्जित की गई है।
गिरोह की ठगी की चालबाजी
साइबर अपराधियों ने एक फर्जी एप्लीकेशन तैयार किया था, जिसे वे प्रधानमंत्री किसान योजना का आधिकारिक पोर्टल बताकर लोगों के बीच प्रचारित करते थे। व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे शेयर किया जाता था। जब कोई व्यक्ति उस पर क्लिक कर ऐप इंस्टॉल करता, तो उसके फोन का डेटा हैक हो जाता था। फिर आरोपी ई-सिम और ओटीपी के जरिए यूपीआई एप्स को कंट्रोल कर खातों से रकम उड़ाते थे।
पुलिस की चुनौती और आगे की कार्रवाई
बालोद पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के अन्य सदस्य भी इस साइबर ठगी में शामिल हैं। उनकी पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। एसपी योगेश पटेल ने प्रेसवार्ता में कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में लोगों को जागरूक रहना बेहद जरूरी है। किसी भी सरकारी योजना के नाम पर फर्जी एप्लीकेशन डाउनलोड न करें और बैंकिंग जानकारी या ओटीपी किसी को साझा न करें।
बढ़ते साइबर अपराध और लोगों की सतर्कता
छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग अब नए-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर, तो कभी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर, लोगों से ठगी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट का उपयोग करते समय साइबर सुरक्षा के मूलभूत नियमों का पालन करना ही सबसे बड़ा बचाव है।
Tags:    

Similar News