फेक आईडी बनाकर मार्कफेड के पूर्व एमडी के नाम से दुष्प्रचार, साइबर ब्रांच ने शुरू की जांच
छग
Raipur. रायपुर। सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आया है, जहां मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए एक अज्ञात व्यक्ति ने फेक आईडी बनाकर विवादास्पद और भ्रामक समाचार प्रसारित किए। आरोपी ने खुद को ‘वैभव सिंहा’ बताते हुए फेसबुक पर एक फर्जी अकाउंट तैयार किया था, जिसमें मनोज सोनी की तस्वीरों और झूठी जानकारी के जरिए लोगों को भ्रमित किया जा रहा था। मामले की शिकायत के बाद अब साइबर ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है, और फर्जी अकाउंट संचालित करने वाले की पहचान के लिए सी-ट्रेस (C-Trace) सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फेसबुक से तकनीकी अनुमति मिलते ही आरोपी की वास्तविक लोकेशन, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सहित पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
फेक प्रोफाइल से फैलाया गया दुष्प्रचार
सूत्रों के अनुसार, ‘वैभव सिंहा’ नामक यूजर ने कुछ दिनों पहले फेसबुक पर एक अकाउंट बनाया और उसमें पूर्व एमडी मनोज सोनी की फोटो लगाई। इसके बाद उस अकाउंट से कई विवादास्पद संदेश और पोस्ट साझा किए गए, जिनमें मनोज सोनी के निजी जीवन और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित भ्रामक सूचनाएं शामिल थीं। फर्जी अकाउंट में लिखा गया था कि मनोज सोनी ने रविशंकर यूनिवर्सिटी रायपुर से स्नातक और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.कॉम की पढ़ाई की है। साथ ही, यह भी बताया गया था कि उन्होंने साल 2023 में विवाह किया है। जबकि हकीकत यह है कि मनोज सोनी एक इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर भारतीय संवर्ग सेवा में इंडियन टेलीकॉम सर्विसेज (ITS) में कार्य किया है। उनकी उम्र पचास वर्ष से अधिक है और उनके बच्चे वर्तमान में हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्ययनरत हैं। इस प्रकार, फेक अकाउंट पर दी गई जानकारियां पूरी तरह से असत्य और भ्रामक हैं।
पहचान छिपाकर फैलाया जा रहा था प्रचार
फेसबुक अकाउंट की जांच में यह भी पाया गया कि यह प्रोफाइल 2023 से सक्रिय है और इसमें केवल 7 पोस्ट हैं, जिनमें से तीन में मनोज सोनी की फोटो लगाई गई है। शुरू में इस अकाउंट के 250 फ्रेंड्स थे, जो अब बढ़कर 270 हो गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इनमें से अधिकांश लोग म्यूचुअल फ्रेंड्स भी नहीं हैं, फिर भी यह अकाउंट लगातार लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहा था और मैसेज के माध्यम से गलत सूचनाएं फैला रहा था। तीन दिन पहले तक अकाउंट में 199 म्यूचुअल फ्रेंड्स थे, जो अब घटकर 23 रह गए हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर इस व्यक्ति की गतिविधियों को लेकर संदेह बढ़ा है।
साइबर ब्रांच ने दर्ज की एफआईआर
पूर्व एमडी मनोज सोनी की शिकायत पर रायपुर साइबर ब्रांच में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि यह मामला फर्जी प्रोफाइल बनाकर किसी की छवि को नुकसान पहुंचाने और गलत सूचनाएं फैलाने से जुड़ा है, जो आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के अंतर्गत आता है। फेसबुक से संपर्क कर आरोपी की डिजिटल पहचान पता लगाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच अधिकारी ने बताया कि सी-ट्रेस सॉफ्टवेयर के माध्यम से फेक अकाउंट के आईपी एड्रेस, लोकेशन और डिवाइस डिटेल्स तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। एक बार फेसबुक की अनुमति मिलते ही आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुनियोजित साजिश की आशंका
साइबर पुलिस को शक है कि यह मामला किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। फर्जी अकाउंट से मनोज सोनी की छवि को धूमिल करने और समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश की गई है। अकाउंट पर ऐसे कई पोस्ट मिले हैं जो विवाद उत्पन्न करने वाले हैं, जिनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना प्रतीत होता है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने केवल मनोज सोनी के नाम से ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन की गलत जानकारियां जोड़कर विश्वसनीयता का भ्रम पैदा किया, ताकि लोग यह समझें कि यह असली प्रोफाइल है।
फर्जी अकाउंट बनाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
छत्तीसगढ़ साइबर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर किसी की छवि खराब करने के मामलों को लेकर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल या पोस्ट की जानकारी तुरंत साइबर ब्रांच या हेल्पलाइन पर दें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स से तकनीकी सहयोग लेकर फेक अकाउंट्स की पहचान की जा रही है। राज्य में अब तक ऐसे कई फर्जी अकाउंट्स का पता लगाया गया है, जिनमें सरकारी अधिकारियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया था।
मनोज सोनी ने की पारदर्शिता की मांग
पूर्व एमडी मनोज सोनी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की गतिविधियां न केवल व्यक्तिगत मानहानि हैं, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास का माहौल भी पैदा करती हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कभी भी सोशल मीडिया पर कोई विवादास्पद पोस्ट नहीं की है। किसी ने जानबूझकर मेरा नाम और तस्वीर इस्तेमाल कर अफवाहें फैलाने की कोशिश की है।” उन्होंने साइबर पुलिस से अनुरोध किया है कि इस प्रकरण की गहराई से जांच कर आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करने से पहले दस बार सोचे।
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों ने भी इस मामले को लेकर चेतावनी दी है कि आज के डिजिटल युग में किसी की भी फोटो या पहचान का गलत उपयोग बहुत आसान हो गया है। ऐसे में नागरिकों को चाहिए कि अपनी गोपनीय जानकारी, फोटो और दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले सतर्कता बरतें। साइबर सेल ने बताया कि इस तरह की फर्जी प्रोफाइल बनाना आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत अपराध है, जिसके लिए तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।