छात्रावास अधीक्षक पदोन्नति पश्चात काउंसलिंग प्रक्रिया विवादों में

Update: 2025-12-30 06:09 GMT

अधिकारियों की तानाशाही से महतारी गौरव सिर्फ घोषणा, पोस्टरों और फाइलों में अटक गई

850 अधीक्षक पदस्थापना से वंचित,शासकीय आदेशों और नियमों की आड़ में मनमानी

रायपुर। छात्रावास अधीक्षक के पद पर वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 में पदोन्नत हुए लगभग 850 अधीक्षक आज तक पदस्थापना से वंचित हैं। पदोन्नति पश्चात कराई जा रही काउंसलिंग प्रक्रिया लगातार विवादित बनी हुई है। आरोप है कि शासकीय आदेशों और नियमों का पालन अधिकारियों द्वारा मनमानी ढंग से नहीं किया जा रहा।

बार-बार दूषित प्रक्रिया और बंदरबाट–वारा न्यारा

आदिम जाति कल्याण विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया 10 जून 2025 से 25 जून 2025 तक पूरी हो जानी थी, लेकिन विवादों के कारण 6 माह से अधिक समय बीत गया। सूत्रों के अनुसार, रायपुर जिला और संभाग में पांचवीं बार रिकाउंसलिंग कराई गई, जिसमें एकल महिला की सीटों में हेरा-फेरी कर बंदरबाट किया गया और लाखों रुपये लेकर वारा न्यारा किया गया, जिससे पात्र को प्राथमिकता के आधार पर सीट नहीं मिली।

एकल महिला को प्राथमिकता का नियम, लेकिन लाभ नहीं

काउंसलिंग नियमों में “एकल महिला को प्राथमिकता” का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद इसका लाभ व्यवहार में नहीं दिया जा रहा। आदेशों में विधवा, परित्यक्ता एवं अविवाहित महिलाएं एकल महिला की श्रेणी में आती हैं, फिर भी अविवाहित महिलाओं को यह कहकर वंचित किया जा रहा है कि वे एकल महिला नहीं होतीं।

अलग कॉलम होने के बाद भी परिभाषा से इनकार

रायपुर जिले के कार्यवाही विवरण (जो कलेक्टर की निगरानी में तैयार हुआ) में विधवा-परित्यक्ता और एकल महिला को अलग-अलग कॉलम में दर्शाया गया है। फिर भी कहा जा रहा है कि अविवाहित महिला एकल महिला नहीं है। सवाल यह है कि जब एकल महिला को अलग कॉलम में दर्शाया गया है, तो फिर उस श्रेणी में कौन शामिल है? आरोप है कि एकल महिला की सीटें जानबूझकर दबाई जा रही हैं, जिससे व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाया जा सके।

नियम गढ़ने और परिभाषा बदलने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, एकल महिलाओं को लाभ से वंचित रखने के लिए बाद में जोड़-तोड़ कर नई परिभाषा गढ़ने की मंशा दिखाई दे रही है, जबकि काउंसलिंग पॉलिसी में ऐसी किसी नई या सीमित परिभाषा का उल्लेख नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाद में नियम या परिभाषा लाकर पहले से दिए गए अधिकार को छीनना पूरी तरह अनुचित है

अविवाहित महिलाओं को अपमानित करने के गंभीर आरोप

अविवाहित महिलाओं के साथ व्यक्तिगत टिप्पणियां कर उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया गया। आरोप है कि विभाग के ही एक सहायक आयुक्त द्वारा यह तथ्य छुपाया गया कि अविवाहित महिलाएं भी लाभ की पात्र हैं। मांग करने पर “इनकी शादी करवा दो”, “एक ही जगह टिकना चाहती हैं” जैसी टिप्पणियों से उनका मजाक उड़ाया गया, जो महिला गरिमा के विरुद्ध है।

सुरक्षा और पारिवारिक सहयोग का सवाल

महिलाओं का कहना है कि उनकी मांग किसी सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और पारिवारिक सहयोग हेतु जिले में पदस्थापना की है, जो उनका वैध अधिकार है। देश के अन्य राज्यों में भी अविवाहित महिलाओं को जिला स्तर पर पोस्टिंग में प्राथमिकता का प्रावधान मौजूद है।

जानकारी न देना भी भेदभाव

किसी भी लाभकारी नियम की जानकारी देना विभागीय अधिकारियों, विशेषकर सहायक आयुक्त की जिम्मेदारी है। आरोप है कि यह जानकारी चयनात्मक रूप से कुछ को दी गई और कुछ से छुपाई गई, और मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

जांच की मांग

पूरा मामला यह संकेत देता है कि, 

एकल महिला की सीटें जानबूझकर क्यों दबाई जा रही हैं,

किसे लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की व्याख्या बदली जा रही है,और पात्र महिलाओं को उनका वैधानिक हक क्यों नहीं दिया जा रहा।

इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

महतारी गौरव वर्ष पर बड़ा सवाल

महतारी गौरव वर्ष 2025–26 के नाम पर महिला सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन जब अविवाहित एवं एकल महिलाएं अपने वैधानिक अधिकारों की मांग करती हैं, तो उन्हें अपमान, उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

सवाल यह है —क्या महतारी गौरव सिर्फ घोषणाओं, पोस्टरों और फाइलों तक ही सीमट कर रह जाएगी?

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