भ्रष्ट अधिकारी ईएनसी बनने लगा रहा पूरा जुगाड़

Update: 2026-07-02 05:21 GMT

रायपुर (जसेरि)। सजाया ता वरिष्ठ अधिकारी को माफ कर फिर से उच्च पद पर पदस्थ किया जा सकता है। ये मामला जल संसाधन विभाग है, छत्तीसगढ़ में यही एक ऐसा विभाग है जहां सरकार की इज़्ज़त दांव पर लगी होती है। भारतीय जनता पार्टी और क्रस्स् के प्रमुख कार्यकर्ता अपनी पार्टी व संगठन को भ्रष्ट और सजाया ़ता अधिकारी के संबंध में मीडिया में खबर छपने को लेकर अवगत कराते हुए रिश्वतखोरी के प्रकरण में दोषी पाए जाने और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होने की स पूर्ण जानकारी दी है। वहीं मैक्सी कुजूर भी अपनी पूरी ताकत और एप्प्रोच लगाकर पैसों के दम पर पद हासिल करने हर कोशिश कर रहे हैं। विभाग में तीन पदों में प्रमुख रूप से अपना क़ब्ज़ा जमा कर बैठे मैक्सी कुजूर का ऐश्वर्य, ठाट-बाट और जलवा देखते ही बनता है। राज्य में विष्णु देव सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के अंतर्गत कार्य कर रही है, ऐसे में लगता नहीं कि मैक्सी कुजूर जो दागी अधिकारियों की लिस्ट में सर्वप्रथम है, उनकी दाल गल रही होगी और वह फिर से श्वहृष्ट बन पाएंगे।

रिश्वत प्रकरण में एसीबी ने किया था गिरफ्तार 

मैक्सी कुजूर, जब जल संसाधन विभाग छुईखदान, राजनांदगांव में कार्यपालन अभियंता थे तब एंटी करप्शन ब्यूरो ने उसे 30/122014 को रिश्वत लेते हुए ट्रैप कर गिर तार किया था। दरअसल प्रधानपाठ बैराज निर्माण कार्य कर रही विनित सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी लक्ष्मीकांत ने मैक्सी कुजूर द्वारा निर्माण कार्य का बिल भुगतान करने के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत एसीबी से 22/12/2014 को की थी। शिकायत की सत्यता जांचने एसीबी ने वायस रिकार्ड करने के लिए कहा। 22/12/2014 को शिकायतकर्ता ने कार्यपालन अभियंता के कार्यालय में पदस्थ आर के साहू को रिकार्डर सौंप कर बातचीत रिकार्ड करवाई जिसकी ट्रांस्क्रिप्ट बाद में एक्स.पी-3 के रूप में तैयार की गयी। एसीबी ने 30/12/2014 को शिकायतकर्ता से दूसरी शिकायत दर्ज कर ट्रैप की योजना बनाई और शिकायतकर्ता को फेनाल्फथलीन पाउडर लगे करंसी नोट 54000 रुपए सौंपे और हरीराज होटल, सिविक सेंटर भिलाई के पास अभियुक्त को रिश्वत देने की योजना बनाई। ट्रैप के अनुसार शिकायतकर्ता ने तय स्थान पर अभियुक्त को रिश्वत के रकम दिए, जिसके तुरंत बाद ट्रैप पार्टी ने अभियुक्त को पकड़ लिया और नोट बरामद किए जो एसीबी द्वारा उपलब्ध कराई गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया

ट्रायल कोर्ट ने प्रकरण में रिश्वत की मांग और स्वीकार दोनों सिद्ध पाते हुए अभियुक्त को दोषी ठहराया और धारा-7 और धारा-13(1)(डी)आर/डव्ल्यू 13(2) के तहत 5-5 वर्ष का सश्रम कारावास व 10,000-10,000 का जुर्माना और जुर्माना न देने पर दोनों कारावास में 2-2 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

हाईकोर्ट ने किया बरी

अभियुक्त ने 2018 में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने अभियुक्त के वकीलों की दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए ऐसे अपराध को सिद्ध करने के लिए ठोस प्रमाण की अनिवार्यता बताते हुए केवल नोटों की बरामदगी को पर्याप्त न मानते हुए अभियुक्त को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

वर्तमान स्थिति- सुप्रीम कोर्ट में एस. एल. पी.

उच्च न्यायालय के बरी करने वाले निर्णय से असंतुष्ट संदीप श्रवण सिंह ने 2026 में सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका(क्रिमिनल) दायर की है। सुप्रीम कोर्ट पोर्टल पर केस विवरण के अनुसार यह मामला संदीप श्रवण सिंह वि. मैक्सी कुजूर व अन्य शीर्षक से डायरी नं. 38024/2026 के रूप में दर्ज है, जिसकी सिथ्ति वर्तमान में पेंडिंग दिखाई गई है।

30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने वाले को पद छोडऩा होगा जरूरी

अगर कोई प्रधानमंत्री, मु यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री किसी गंभीर अपराध के मामले में गिर तार होने के बाद लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उन्हें पद छोडऩा पड़ सकता है। इससे जुड़े बिलों को सरकार मानसून सत्र में दोबारा पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक 130वें संविधान संशोधन बिल पर बनी संसद की संयुक्त संसदीय समिति इससे जुड़े प्रावधानों को हटाने के पक्ष में नहीं है। समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में ऐसे सुरक्षा उपाय जोड़े जा सकते हैं, ताकि राजनीतिक बदले की भावना से झूठे मामलों में गिर तारी कर किसी सरकार को अस्थिर करने के लिए इस कानून का दुरुपयोग न हो।

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