Durg. दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को बोरसी के न्यू मन्नम नगर में एक घर पर चल रही प्रार्थना सभा को लेकर हंगामा हो गया। हिंदू संगठनों ने इसे धर्मांतरण की गतिविधि बताते हुए विरोध किया। सूचना मिलने पर तहसीलदार प्रफुल गुप्ता और एसपी सुखनंदन राठौर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के बाद पुलिस ने दो पास्टर— मनोहर तांडी और आकाश बसेरा को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए गए हैं।
प्रार्थना सभा पर आरोप
हिंदू जागरण मंच के नगर संयोजक प्रदीप सिन्हा ने दावा किया कि इलाके में लंबे समय से धर्मांतरण की गतिविधियाँ चल रही हैं। उनके अनुसार, ओडिशा से आए मजदूरों को भोजन और इलाज के नाम पर लालच दिया जाता है और धीरे-धीरे उन्हें प्रार्थना सभाओं में शामिल कराया जाता है। सिन्हा ने कहा कि पिछले एक-दो साल से यह सिलसिला चल रहा है। बीच में कुछ समय तक यह गतिविधियाँ बंद रहीं, लेकिन हाल ही में फिर से शुरू हो गईं। सिन्हा का आरोप है कि रविवार को आयोजित सभा में हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गईं, जिससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इसके बाद संगठन ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत पर थाना प्रभारी राजेंद्र लहरे ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने दोनों पास्टरों को हिरासत में लेकर धारा 299 बीएनएस (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया है और आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे कदम उठाए जाएंगे।
क्रिश्चियन काउंसिल ने आरोपों को खारिज किया
इस घटना पर यूनाइटेड क्रिश्चियन काउंसिल के जिला अध्यक्ष एम. जोनाथन जॉन ने कड़ा विरोध दर्ज किया। उन्होंने कहा कि सभा में केवल सामान्य प्रार्थना हो रही थी, धर्मांतरण का कोई प्रयास नहीं किया गया। जॉन ने तर्क दिया- “अगर धर्मांतरण कराने की क्षमता होती तो विरोध करने वाले लोग भी प्रभावित हो जाते। यह सरासर झूठ और मनगढ़ंत आरोप हैं।” उनका कहना है कि हर रविवार को कुछ असंवैधानिक तत्व चर्च या प्रार्थना सभाओं को निशाना बनाकर अनावश्यक विवाद खड़ा करते हैं। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी तनातनी
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। हालांकि प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय संगठनों के बीच इस मुद्दे पर गहन चर्चा हो रही है। एक वर्ग इसे धर्मांतरण का षड्यंत्र बता रहा है, जबकि दूसरा इसे साधारण धार्मिक सभा करार दे रहा है। धर्मांतरण का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहले से संवेदनशील रहा है। आए दिन विभिन्न जिलों से इस तरह की शिकायतें सामने आती रहती हैं। दुर्ग की ताज़ा घटना ने एक बार फिर इस विवाद को हवा दे दी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच किस निष्कर्ष पर पहुँचती है और कोर्ट आगे क्या आदेश देता है।