कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने घने वनांचल के शासकीय प्राथमिक शाला लामीखार का निरीक्षण

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Update: 2025-12-20 17:33 GMT
Raigarh. रायगढ़। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी घरघोड़ा एवं धरमजयगढ़ विकासखण्ड के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने धरमजयगढ़ तहसील के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत देउरमार के आश्रित ग्राम लामीखार में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए किए जा रहे नवाचार प्रयासों का मुआयना किया और विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। कलेक्टर ने कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी शैक्षणिक समझ, भाषा ज्ञान और आत्मविश्वास का आकलन किया। बच्चों द्वारा हिंदी और अंग्रेजी में सहजता से दिए गए उत्तरों से कलेक्टर अत्यंत प्रसन्न दिखाई दिए। उन्होंने बच्चों की अभिव्यक्ति क्षमता, अनुशासन और सीखने की रुचि की प्रशंसा करते हुए इसे शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का परिणाम बताया।

विद्यालय परिसर में निर्मित पूर्णतः शिक्षण-अनुकूल प्रिंट-रिच वातावरण का अवलोकन करते हुए कलेक्टर ने कबाड़ से जुड़े जुगाड़ की अवधारणा पर आधारित पवन चक्की, सौर ऊर्जा मॉडल, यातायात संकेत, माइलस्टोन, भारत एवं छत्तीसगढ़ के मानचित्र सहित विविध शिक्षण सामग्री को अनुभव आधारित शिक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार बच्चों में जिज्ञासा, तार्किक सोच और व्यवहारिक ज्ञान को विकसित करते हैं। कलेक्टर ने मुस्कान पुस्तकालय का निरीक्षण किया, जिसमें बंद पुस्तकालय, खुला पुस्तकालय और चर्चा-पत्र पुस्तकालय शामिल हैं। लगभग 1500 पुस्तकों का संचालन एवं रख-रखाव विद्यार्थी स्वयं करते हैं। उन्होंने बच्चों के जन्मदिन पर आयोजित “एक दिन का गुरुजी” और “आज का फूल” जैसी गतिविधियों को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने वाला नवाचार बताया।

कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक शाला लामीखार को जिले के अन्य विद्यालयों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया और निर्देश दिए कि विद्यालय में किए जा रहे नवाचार, शिक्षण पद्धतियों और सामुदायिक सहभागिता को निरंतर आगे बढ़ाया जाए तथा इन्हें अन्य शालाओं में भी अपनाने हेतु प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालय में विकसित किचन गार्डन, हर्बल गार्डन, मसाला बगान और गुलाब गार्डन का निरीक्षण किया। लगभग 128 किस्मों के फलदार, फूलदार और औषधीय पौधों- जैसे अंजीर, सेव, चंदन, नींबू, कटहल,
चिकोतरा
और मौसंबी को उन्होंने पर्यावरण शिक्षा एवं व्यवहारिक अधिगम का सशक्त माध्यम बताया। इस कार्य में विद्यार्थियों, अभिभावकों और समुदाय की सहभागिता को भी उन्होंने सराहा। लगभग 314 की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव में संचालित विद्यालय में वर्तमान में कुल 46 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 30 बालक और 16 बालिकाएं शामिल हैं। वर्ष 2025 में विद्यालय के 8 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन हुआ। इस उपलब्धि पर कलेक्टर ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और नवाचारों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया, जो पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी है।
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