छत्तीसगढ़ भवन में CM साय की आदिवासी लोक कलाकारों व मंत्रियों से मुलाकात

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Update: 2026-05-24 17:43 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के कैबिनेट मंत्रियों और आदिवासी लोक कलाकारों के साथ सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और कला के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ इस बैठक में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और केदार कश्यप भी उपस्थित रहे। इसके अलावा आदिवासी लोक कलाकारों का प्रतिनिधिमंडल और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
यह सभी प्रतिनिधि “नेशनल ट्राइबल कल्चरल कॉन्क्लेव” में भाग लेने के लिए दिल्ली आए हुए थे। इसी दौरान छत्तीसगढ़ भवन में यह सौहार्दपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जहां राज्य की जनजातीय संस्कृति और लोक कलाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
चर्चा के दौरान लोक कलाकारों ने अपनी कला, परंपराओं और सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पारंपरिक लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए और अधिक संस्थागत प्रयासों की आवश्यकता है। मंत्रियों ने भी इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति के संरक्षण को लेकर सरकार की योजनाओं और चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य में जनजातीय समुदाय के विकास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि आधुनिक समय में बदलते सामाजिक परिवेश के बीच आदिवासी कला और परंपराओं को संरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। छत्तीसगढ़ भवन में हुई इस बैठक को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें राज्य की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने आपसी सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए निरंतर संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई। यह मुलाकात राज्य की सांस्कृतिक नीति और आदिवासी विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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