मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय सम्मान पर बसंत साहू को बधाई दी

छग

Update: 2025-12-06 14:53 GMT
Raipur. रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के गौरव, धमतरी जिले के कुरूद निवासी बसंत साहू को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा ‘दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की खुशी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने इसे पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवशाली क्षण बताते हुए श्री साहू को हार्दिक बधाई दी। श्री बसंत साहू की कहानी साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। वर्ष 1995 में हुए एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के कारण उन्हें 95 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने जीवन में कभी हार नहीं मानी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी अद्भुत चित्रांकन कला और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर उजागर किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बसंत साहू की यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत और लगन का परिचायक है, बल्कि समर्पण और संघर्ष के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रेरक उदाहरण भी है। उन्होंने बताया कि ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं, जो दिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और कला के माध्यम से उच्च लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। राज्य सरकार ने श्री साहू की कला और उपलब्धियों को हमेशा सम्मान दिया है। उनके योगदान से छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को नए आयाम मिले हैं। उनकी प्रतिभा और समर्पण के कारण ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि बसंत साहू का जीवन हमें यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास, धैर्य और लगन के साथ सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने श्री साहू के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका प्रेरक योगदान और उपलब्धियाँ आने वाले समय में भी समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। प्रदेशवासियों ने भी बसंत साहू के इस गौरवपूर्ण सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त की है और उनकी कला और जीवन संघर्ष को प्रेरक बताया है। इस प्रकार, बसंत साहू की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत का प्रमाण है, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कला को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का गौरव भी है। उनके साहस, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति का यह प्रतीक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।
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