छत्तीसगढ़ी भाषा हमारी संस्कृति और पहचान की आत्मा: बृजमोहन अग्रवाल

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Update: 2025-08-14 15:55 GMT
Raipur. रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की आत्मा है। इसमें हमारे लोकगीतों की मिठास, कहानियों की सरलता और पीढ़ियों से चली आ रही लोकबुद्धि की गहराई बसती है। यह भाषा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी पहचान को सुरक्षित रखती है। अग्रवाल आज छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा की मिठास और भावनात्मक जुड़ाव को बनाए रखना हर छत्तीसगढ़वासी की जिम्मेदारी है।
साहित्यकारों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाने वाले सम्माननीय साहित्यकार डॉ. रमाकांत सोनी, डॉ. संतराम देशमुख, गणेश यदु, मनमोहन ठाकुर, सनत तिवारी एवं हर प्रसाद 'निडर' को सम्मानित किया गया। सांसद अग्रवाल ने कहा कि ये साहित्यकार अपनी रचनाओं से छत्तीसगढ़ की अस्मिता को नई ऊंचाई देते रहे हैं और इनके योगदान को पीढ़ियां याद रखेंगी।
पुस्तकों का विमोचन और श्रद्धांजलि
इस अवसर पर आयोग द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा को पूरे विश्व में पहचान दिलाने वाले महान कवि स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अग्रवाल ने कहा कि सुरेंद्र दुबे जी ने हास्य, व्यंग्य और संवेदनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी साहित्य को अमर कर दिया।
जनप्रतिनिधियों और साहित्यकारों की उपस्थिति
कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनुज शर्मा, साहित्यकार पुरंदर मिश्रा, जनप्रतिनिधि मोतीलाल साहू, प्रदेशभर से आए साहित्यकार, प्रबुद्धजन और राजभाषा आयोग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर
प्रयास
करने का संकल्प लिया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बदलते समय में जहां स्थानीय भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर हैं, वहीं छत्तीसगढ़ी को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए शिक्षा, साहित्य, कला और मीडिया में इसका अधिक से अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा में हमारी लोककथाएं, कहावतें, गीत, त्योहार और लोकसंस्कृति सजीव हैं, जिन्हें आगे बढ़ाना हमारा दायित्व है।
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