BREAKING: छत्तीसगढ़ राजभवन का नाम बदला, अब लोकभवन के नाम से जाना जाएगा

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Update: 2025-12-02 15:08 GMT
Raipur. रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद देशभर में राजभवनों के नाम में परिवर्तन किया गया है। छत्तीसगढ़ में भी राजभवन का नाम बदलकर अब ‘लोकभवन’ कर दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, अब से सभी शासकीय कार्यों, पत्राचार और सरकारी दस्तावेजों में राजभवन के स्थान पर लोकभवन का ही प्रयोग होगा। राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने इस बदलाव का आदेश आज जारी किया। उन्होंने बताया कि यह निर्णय राज्यपालों के सम्मेलन-2024 में लिए गए सुझाव के अनुरूप किया गया है, जिसमें सभी राजभवनों का नाम बदलकर लोकभवन करने की अनुशंसा की गई थी।
नाम परिवर्तन की पृष्ठभूमि
नाम परिवर्तन का यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल के तहत उठाया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी और शासकीय संस्थानों में जनता के प्रति सेवा और जनकल्याण के संदेश को स्पष्ट करना है। केंद्रीय स्तर पर भी इसी दिशा में बदलाव किए गए हैं। दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय का नया नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। इस नाम का अर्थ है—‘सेवा का पवित्र स्थल’। 2016 में रेसकोर्स रोड का नाम बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया था, जिसका अर्थ है जनकल्याण का केंद्र। राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ रखा गया, जो कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ में राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन करना इसी नीति का हिस्सा है। यह बदलाव सरकार की जनसेवा और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
लोकभवन का महत्व और उद्देश्य
डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने बताया कि लोकभवन का नाम बदलने का उद्देश्य यह संदेश देना है कि राज्यपाल का कार्यालय अब जनता के लिए खुला और सेवा के लिए समर्पित स्थान है। अब लोकभवन न केवल प्रशासनिक कार्यों का केंद्र होगा, बल्कि यह राज्य में जनता के प्रति उत्तरदायित्व और जनकल्याण के मूल संदेश का प्रतीक भी बनेगा। इस आदेश के बाद सभी सरकारी दस्तावेज, शासकीय पत्राचार और राजभवन से संबंधित सभी सूचनाओं में लोकभवन का ही प्रयोग किया जाएगा। सरकारी वेबसाइटों, प्रेस नोट और पत्रिकाओं में भी अब इस नए नाम का ही उल्लेख होगा।
सार्वजनिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के नाम परिवर्तन से जनता में प्रशासनिक संस्थानों के प्रति विश्वास और उनका जुड़ाव बढ़ेगा। साथ ही यह नामकरण एक प्रेरक संदेश भी देता है कि सभी सरकारी संस्थान जनता की सेवा के लिए हैं। राज्य के नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भी इस कदम को सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रशासनिक पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।
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