ऑनलाइन मनी गेमिंग पर छत्तीसगढ़ सरकार का कड़ा रुख

छग

Update: 2025-08-25 16:29 GMT
Durg. दुर्ग। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने रविवार को दुर्ग जिले के मड़ियापार गांव में आयोजित पोला महोत्सव और किसान महोत्सव के मंच से ऑनलाइन मनी गेमिंग और सट्टेबाजी के खिलाफ राज्य सरकार का सख्त रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स, जिनमें असली पैसे का लेन-देन होता है, समाज के लिए बेहद हानिकारक हैं। राज्य सरकार ऐसे ऐप्स के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई करेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
ऑनलाइन गेमिंग पर उपमुख्यमंत्री का बड़ा बयान
पत्रकारों से चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा- “ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और सट्टेबाजी में शामिल या इसे बढ़ावा देने वालों पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी। समाज और युवाओं को बर्बाद करने वाली इस कुप्रथा को खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है।” उन्होंने संसद द्वारा पारित “ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन और विनियमन विधेयक, 2025” का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून नागरिकों को ऑनलाइन मनी गेमिंग के खतरों से बचाने के लिए बनाया गया है। अब राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि इसे सख्ती से लागू करें और छत्तीसगढ़ सरकार इसे पूरी निष्ठा के साथ लागू करेगी।
महादेव ऐप संचालकों पर कसा शिकंजा
छत्तीसगढ़ का नाम कुख्यात महादेव सट्टा ऐप की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा है। इसके प्रमुख संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा चुका है। दोनों ने वारंट रद्द करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी।
बीते शनिवार रायपुर की स्पेशल कोर्ट में हुई सुनवाई में उनके वकीलों ने तीन महीने का समय मांगते हुए सरेंडर की बात रखी। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यह साफ कर दिया कि केवल बिना शर्त आत्मसमर्पण (अनकंडीशनल सरेंडर) की स्थिति में ही वारंट रद्द करने पर विचार होगा। अदालत ने अब इस पर फैसला 3 नवंबर तक सुरक्षित रख लिया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट पहले ही उनकी याचिका खारिज कर चुका है, जबकि रवि उप्पल की एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उपमुख्यमंत्री ने इस पर कहा -“हमें भरोसा है कि अदालत उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करेगी। विष्णु देव साय की सरकार सुशासन और कानून व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है।”
भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग का आकार
भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में इसका मार्केट साइज लगभग 32,000 करोड़ रुपए है। इसमें से करीब 86% रेवेन्यू रियल-मनी गेम्स से आता था, जिसमें खिलाड़ी असली पैसे लगाकर खेलते थे।
लेकिन सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक और आर्थिक नुकसान कहीं ज्यादा हो रहा है।
ऑनलाइन मनी गेमिंग से जुड़े खतरे
मानसिक और आर्थिक नुकसान
रियल-मनी गेमिंग से कई लोग मानसिक तनाव और आर्थिक तबाही का शिकार हुए।
कई परिवारों ने जीवन की बचत गँवा दी और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं सामने आईं।
अनुमान है कि इस कारण लोगों को लगभग 20,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गेमिंग लत को गेमिंग डिसऑर्डर के रूप में मान्यता दी है।
युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और पारिवारिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग
रियल-मनी गेमिंग के जरिए अनधिकृत चैनलों से लेन-देन होने की आशंका रहती है।
इससे मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ऑनलाइन गेमिंग कानून का महत्व
इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में “ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन और विनियमन विधेयक” संसद में पारित किया।
20 अगस्त को लोकसभा,
21 अगस्त को राज्यसभा,
और 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून अस्तित्व में आया।
इस कानून के तहत—
रियल-मनी गेम्स और उनका प्रचार पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है।
विशेष रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई गई है, जो गेमिंग कंपनियों को रजिस्टर करेगी और निगरानी रखेगी।
यदि कोई गेम पैसे के लेन-देन में पाया गया, तो उस पर प्रतिबंध और संचालकों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
ई-स्पोर्ट्स और फ्री गेम्स को मिलेगी बढ़ावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-स्पोर्ट्स और फ्री गेम्स (जैसे पबजी, फ्री फायर आदि), जिनमें पैसे का लेन-देन नहीं होता, उन्हें बढ़ावा मिलेगा।
उद्देश्य है कि केवल मनोरंजन और स्किल-बेस्ड गेमिंग को प्रोत्साहित किया जाए।
आर्थिक असर और रोजगार की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि- मनी-बेस्ड गेम्स बंद होने से करीब 2 लाख नौकरियां प्रभावित होंगी। सरकार को सालाना लगभग 20,000 करोड़ रुपए टैक्स का नुकसान हो सकता है। लेकिन उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्र सरकार का रुख साफ है। “समाज और नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है, आर्थिक नुकसान बाद की चिंता है।”
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