CGPSC भर्ती घोटाला: पालकों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार से किया भावुक आग्रह

छग

Update: 2026-01-06 13:06 GMT
Raipur. रायपुर। CGPSC घोटाले को लेकर आज पालकों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मीडिया के माध्यम से सरकार को आग्रह किया है कि बच्चों का भविष्य देखते हुए उनकी मेहनत को सही अंजाम के तहत बिना भेदभाव के याचिकाकर्ताओं को जांच के परिणाम के अधीन नियुक्ति आदेश जारी करने का निर्देश दिए जाए। गौरतलब है कि ये मामला CGPSC घोटाले को लेकर था। टोमन सोनवानी फिलहाल जेल में है, जिसमें उच्च न्यायलय ने आदेश दिया जिसकी आदेश कॉपी इस खबर के साथ अटैच की जा रही है।

1 करोड़ लेकर टामन गिरोह ने बना दिया डिप्टी कलेक्टर, CBI जांच में खुलासा






क्लिक करें और देखें आदेश की कॉपी

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा-2021 से जुड़ा बहुचर्चित भर्ती प्रकरण अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा विस्तृत जांच के बाद अंतिम चार्जशीट दाखिल किए जाने से उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जिनकी चयन प्रक्रिया को जांच में निष्पक्ष और निष्कलंक पाया गया है। अब राज्य सरकार के पास नियुक्ति आदेश रोके रखने का कोई ठोस आधार शेष नहीं बचा है।
गौरतलब है कि CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2021 की अधिसूचना 26 नवम्बर 2021 को जारी की गई थी। इसके माध्यम से राज्य की 20 विभिन्न सेवाओं के कुल 171 पदों पर भर्ती प्रस्तावित थी। प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा वर्ष 2022 में आयोजित की गई, जबकि अंतिम मेरिट सूची और चयन सूची 11 मई 2023 को जारी की गई। परिणाम घोषित होने के बाद परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात और कदाचार के आरोप सामने आए, जिसके आधार पर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इस याचिका में विशेष रूप से 18 चयनित अभ्यर्थियों को आरोपों के घेरे में रखा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ACB/EOW छत्तीसगढ़ और थाना अर्जुन्दा, जिला बालोद में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2024 को अधिसूचना जारी कर CGPSC द्वारा वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच CBI को सौंप दी। CBI ने मामले की गहन और तकनीकी जांच की तथा 31 दिसम्बर 2025 को सक्षम न्यायालय में अंतिम चार्जशीट प्रस्तुत की।
CBI की चार्जशीट में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। वहीं, शेष चयनित अभ्यर्थियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को जांच में निराधार पाया गया। जांच के दौरान बारनवापारा स्थित एक रिसॉर्ट में हुई छापेमारी में कुछ दस्तावेज और 29 अभ्यर्थियों की एक सूची बरामद हुई थी। CBI ने इन 29 लोगों को गवाह के रूप में शामिल किया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ये सभी एक ही कोचिंग संस्थान के संचालक के मार्गदर्शन में परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 29 में से किसी भी अभ्यर्थी का अंतिम चयन नहीं हुआ था और वे किसी भी पद पर नियुक्त नहीं हुए।
इसी बीच जांच लंबित होने का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने CGPSC 2021 के कई चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए। इससे प्रभावित होकर चयनित अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ में रिट याचिकाएं दायर कीं। WPS क्रमांक 2311/2024 में एकलपीठ ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल FIR दर्ज होने या जांच लंबित रहने के आधार पर उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं रोकी जा सकती, जिनके चयन के विरुद्ध कोई प्रतिकूल या ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है। न्यायालय ने राज्य सरकार की कार्रवाई को मनमानी और भेदभावपूर्ण करार देते हुए जांच के परिणाम के अधीन नियुक्ति आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए Writ Appeal क्रमांक 730/2025 दायर की, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने अपील को खारिज कर दिया। युगलपीठ ने एकलपीठ के फैसले की पुष्टि करते हुए दोहराया कि निर्दोष रूप से चयनित अभ्यर्थियों को सामूहिक दंड नहीं दिया जा सकता। अब जबकि CBI द्वारा जांच पूरी कर अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, नियुक्ति आदेश रोके जाने का आधार स्वतः समाप्त हो गया है। उच्च न्यायालय के अंतिम और बाध्यकारी निर्णयों के आलोक में यह स्पष्ट हो गया है कि CGPSC 2021 के सभी निर्दोष एवं निष्कलंक चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो चुका है। ऐसे में यदि नियुक्ति आदेश जारी करने में और विलंब किया जाता है, तो यह न केवल न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना होगी, बल्कि विधि के स्थापित सिद्धांतों के भी विपरीत माना जाएगा।
Tags:    

Similar News