CG: बोर्ड परीक्षा में दो छात्रों को प्रवेश नहीं देने पर प्राचार्य टीआर रानाडे निलंबित

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Update: 2025-12-05 14:30 GMT
Balod. बालोद। बालोद जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, दल्लीराजहरा के प्राचार्य टीआर रानाडे को बोर्ड परीक्षा में दो छात्रों को प्रवेश नहीं देने के विवाद के बाद निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई शिक्षा विभाग द्वारा की गई जांच में शिकायत की पुष्टि होने के बाद की गई। अवर सचिव, शिक्षा विभाग ने प्राचार्य के निलंबन का आदेश जारी किया है।

पूरक परीक्षा में छात्रों को प्रवेश नहीं दिया गया
मामला 18 जुलाई 2025 का है, जब हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा की पूरक परीक्षा आयोजित की गई थी। आदिवासी ब्लॉक डौंडी के दो छात्र करण कुमार उर्वशा और कुणाल भूआर्य अपने परीक्षा केंद्र शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नया बाजार दल्लीराजहरा (नेहरू स्कूल) पहुंचे। छात्र निर्धारित समय से पहले, सुबह 8:30 बजे केंद्र पर पहुंचे। परीक्षा कक्ष में प्रवेश के दौरान प्राचार्य ने दावा किया कि छात्र पूर्ण यूनिफॉर्म नहीं पहनकर आए हैं, और उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया। छात्रों ने बताया कि शर्ट और टाई पहनकर आए थे, लेकिन पैंट गीली होने के कारण पहनकर नहीं आए। उन्होंने अनुमति देने का अनुरोध किया, लेकिन प्राचार्य ने उन्हें पूर्ण यूनिफॉर्म पहनने के लिए बाध्य किया। छात्र पुनः अपने गांव लौटकर यूनिफॉर्म की पैंट पहनकर लौटे, लेकिन तब तक समय 10:15 बज चुका था, और केंद्राध्यक्ष ने समय विलंब का हवाला देते हुए उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर दिया।

जनप्रतिनिधियों की शिकायत और कलेक्टर की कार्रवाई
इस घटना के बाद छात्रों और जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से मिलकर शिकायत दर्ज कराई। कलेक्टर ने तुरंत प्राचार्य को केंद्राध्यक्ष पद से हटाने के निर्देश दिए और डीईओ को निलंबन प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्देश दिया। शिक्षा विभाग की जांच में प्राचार्य के खिलाफ शिकायत की पुष्टि हुई। इसके परिणामस्वरूप टीआर रानाडे को निलंबित कर दिया गया और उनकी मुख्यालयीय नियुक्ति डीईओ कार्यालय बालोद में कर दी गई।

अन्य शिकायतें और लापरवाही
जांच में यह भी सामने आया कि प्राचार्य टीआर रानाडे के खिलाफ अन्य कई शिकायतें भी दर्ज थीं, जिनमें शामिल हैं:
शिक्षिका अल्का शर्मा के परिधान पर अनुचित टिप्पणी।
8 जुलाई को मध्याह्न भोजन में कीड़े पाए जाने के बाद उच्च कार्यालय के नोटिस का जवाब नहीं देना।
पालकों से अनुचित व्यवहार और लापरवाही।
स्वेच्छाचारिता और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन।
जांच में इन शिकायतों को भी सही पाया गया, जिससे प्राचार्य का निलंबन और न्यायसंगत ठहराया गया।

शिक्षा विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
अवर सचिव, शिक्षा विभाग ने कहा कि परीक्षा में छात्रों को प्रवेश न देने जैसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों और प्राचार्यों से अपील की कि सभी छात्रों को नियमों के अनुसार समान अवसर प्रदान करें और शैक्षिक वातावरण को सकारात्मक बनाए रखें। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के खिलाफ प्रशासन सतर्क है। प्राचार्य के निलंबन से यह संदेश जाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में
अनुशासन
और छात्रों के अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता है।

छात्रों के अधिकार और भविष्य की सुरक्षा
इस मामले में कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि छात्रों को किसी भी कारण से परीक्षा में वंचित नहीं किया जाएगा, और उनकी सुरक्षा एवं अधिकारों की गारंटी शासन स्तर से सुनिश्चित की जाएगी। बालोद में इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और छात्रों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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