Narayanpur. नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। गहरे जंगलों में सर्चिंग कर रहे बस्तर फाइटर बल के एक जवान पर भालू ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। साथी जवानों की सूझबूझ और त्वरित प्रतिक्रिया से जवान की जान बच सकी और उसे हेलीकॉप्टर के जरिए जगदलपुर के मेकाज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल घायल जवान की हालत स्थिर बताई जा रही है।
सर्चिंग के दौरान अचानक भालू का हमला
यह घटना 4 अगस्त की सुबह की है जब बस्तर फाइटर बल के जवान नारायणपुर जिले के गारगा कैंप से एक सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। यह क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है, जहां माओवादी गतिविधियों की आशंका के चलते अक्सर सुरक्षा बलों द्वारा अभियान चलाया जाता है। उसी दौरान, सर्च ऑपरेशन में शामिल जवान जब जंगल के भीतर एक संकरी पगडंडी से गुजर रहे थे, तभी यह अप्रत्याशित घटना हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दंतेवाड़ा निवासी रविन्द्र ओयाम, जो बस्तर फाइटर बल में आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं, सर्चिंग दस्ते में शामिल थे। उनके आगे तीन जवान पहले ही सुरक्षित रूप से गुजर चुके थे, लेकिन जैसे ही रविन्द्र आगे बढ़े, एक घात लगाए भालू ने उन पर अचानक झपट्टा मार दिया। भालू के हमले में उनकी जांघ बुरी तरह से फट गई और वह जमीन पर गिर पड़े।
जंगल में ही किया गया प्राथमिक उपचार
भालू के हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन साथी जवानों ने साहस और सूझबूझ से काम लिया। सबसे पहले घायल जवान को सुरक्षित स्थान पर लाया गया और जंगल में ही प्राथमिक उपचार किया गया। इसके बाद सीनियर अधिकारियों को तत्काल इसकी सूचना दी गई। नारायणपुर जिला पुलिस और सीआरपीएफ के उच्च अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए जवान को एयरलिफ्ट कराने का निर्णय लिया। जवान को हेलीकॉप्टर से नारायणपुर से जगदलपुर स्थित मेकाज अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया।
डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी, हालत फिलहाल स्थिर
मेकाज अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, जवान रविन्द्र ओयाम की जांघ में गहरी चोटें आई हैं, लेकिन समय पर उपचार मिलने के कारण उनकी हालत खतरे से बाहर है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखरेख में लगी हुई है। फिलहाल उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया है और अगले 48 घंटे उनके लिए बेहद अहम बताए जा रहे हैं।
बस्तर फाइटर्स की हिम्मत और जमीनी हकीकत
बस्तर फाइटर बल को माओवादी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने के लिए तैयार किया गया है। ये बल विशेष रूप से बस्तर के स्थानीय युवाओं से गठित किया गया है जो भूगोल, भाषा और परिस्थितियों से परिचित होते हैं। जंगलों में ऑपरेशन के दौरान उन्हें सिर्फ नक्सलियों ही नहीं, बल्कि जंगली जानवरों के खतरों का भी सामना करना पड़ता है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि बस्तर जैसे क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों को नक्सलवाद के साथ-साथ वन्यजीवों से भी खतरा बना रहता है। इस तरह की घटनाएं इन इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों की चुनौतियों को और अधिक उजागर करती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने की सराहना
जवान रविन्द्र ओयाम के उपचार और त्वरित बचाव अभियान को लेकर पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने संतोष जताया है। नारायणपुर एसपी और बस्तर रेंज के अन्य वरिष्ठ अफसरों ने जवान की बहादुरी और उनके साथियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कार्यरत जवानों को और बेहतर मेडिकल ट्रेनिंग और प्राथमिक उपचार किट की सुविधा दी जाएगी। बस्तर संभाग में सुरक्षा बल जहां एक ओर नक्सली गतिविधियों से दो-चार होते हैं, वहीं दूसरी ओर जंगल के बीच जानवरों का खतरा भी बना रहता है। हाथी, भालू, तेंदुआ जैसे हिंसक जानवर कई बार सुरक्षा बलों और आम ग्रामीणों पर हमला कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में ऑपरेशन के दौरान वन्य जीवों की लोकेशन की भी ट्रैकिंग होनी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।