हौसलों की उड़ान: दिव्यांगता को मात देकर चितुराम नाग बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

छग

Update: 2026-07-31 12:38 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ वित्त एवं विकास निगम की स्वरोजगार योजना ने एक दिव्यांग युवक के जीवन को नई दिशा दी है। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी चितुराम नाग ने अपनी मेहनत, लगन और ईमानदारी से यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

आत्मविश्वास, वित्तीय अनुशासन और स्वावलंबन का प्रमाण
चितुराम नाग ने वर्ष 2017 में अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ वित्त एवं
विकास निगम
से 3.60 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया था। उन्होंने इस राशि का उपयोग अपने रोजगार को मजबूत करने में किया और लगातार मेहनत करते हुए अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आर्थिक कठिनाइयों और शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने पूरे ऋण का समय सीमा के भीतर भुगतान कर दिया। अब उनका ऋण खाता पूरी तरह बंद हो चुका है। यह उपलब्धि उनके आत्मविश्वास, वित्तीय अनुशासन और स्वावलंबन का प्रमाण है। लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। चितुराम नाग की इस सफलता पर छत्तीसगढ़ वित्त एवं विकास निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उनकी कहानी आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।

दिव्यांग हितग्राहियों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से और अधिक सक्षम बनाने के लिए निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मूक-बधिर और अन्य दिव्यांग हितग्राहियों को विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे अपनी आजीविका स्वयं चला सकें। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे वे प्रतिदिन 300 से 500 रुपये तक की नियमित आय अर्जित कर सकें और सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। चितुराम नाग की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर शासकीय योजनाओं का लाभ मिले और व्यक्ति मेहनत के साथ आगे बढ़े, तो आत्मनिर्भरता का सपना जरूर साकार होता है। उनकी उपलब्धि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण और दिव्यांग सशक्तिकरण की सशक्त कहानी है।
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