CG BREAKING: कस्टम मिलिंग स्कैम में बड़ी कार्रवाई, दीपेन चावड़ा पर चालान पेश

छग

Update: 2025-12-09 15:52 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग स्कैम में शनिवार को बड़ी कार्रवाई हुई है। एसीबी–ईओडब्ल्यू (ACB–EOW) ने गिरफ्तार आरोपी दीपेन चावड़ा के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया। दीपेन चावड़ा को नवंबर 2025 में रायपुर से गिरफ्तार किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि चावड़ा ने लोकसेवकों की ओर से 20 करोड़ रुपए की राशि मिलर्स से वसूली की थी। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की टीम को इस वसूली के ठोस सबूत मिले हैं। ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 01/24 में चावड़ा को अनवर ढेबर का करीबी सहयोगी बताया गया है।
ACB–EOW की जांच के अनुसार, चावड़ा सिर्फ इस स्कैम में ही नहीं, बल्कि विभाग में दर्ज अन्य मामलों में भी लगभग 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध धनराशि का ‘प्रबंधक’ था। वह बड़े नेटवर्क का हिस्सा बनकर रकम के संग्रह, प्रबंधन और आगे पहुंचाने का काम करता था। कस्टम मिलिंग घोटाला फरवरी 2025 में सामने आया था। इसमें तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की गई थी। अक्टूबर 2025 में अनवर ढेबर और IAS अनिल टुटेजा के खिलाफ भी विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में चालान पेश किया जा चुका है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, चावड़ा से जब्त दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत यह संकेत देते हैं कि चावल मिलिंग के नाम पर बड़ी मात्रा में कमीशन वसूला जाता था। यह रकम व्यवस्थित रूप से अलग-अलग चैनलों के जरिए आगे भेजी जाती थी, जिसमें चावड़ा का प्रमुख रोल था। EOW का मानना है कि चावड़ा की गिरफ्तारी और चालान से इस स्कैम में शामिल बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। आगे पूछताछ में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। जांच में सामने आया कि IAS अनिल टुटेजा ने खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में 104 लाख मैट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान लगाया। इसके लिए उन्होंने रोशन चंद्राकर के साथ मिलकर खाद्य सचिव को केंद्रीय कोटा मांगने के निर्देश दिए।
जबकि 2020-21 में केवल 24 लाख मैट्रिक टन का कोटा पूरा किया गया था। अनुमानित उपार्जन के समाधान के लिए कस्टम मिलिंग में मिलरों को विशेष प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की योजना बनाई गई। इसी के माध्यम से कथित रूप से अवैध वसूली की गई। EOW का आरोप है कि अनिल टुटेजा ने मार्कफेड में वसूली सुनिश्चित करने के लिए राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पर दबाव डाला। इस उद्देश्य से तत्कालीन कोषाध्यक्ष नरेश सोमानी को हटाकर रोशन चंद्राकर को नियुक्त किया गया। चार्जशीट के अनुसार, रोशन चंद्राकर ने पदभार संभालने के बाद राइस मिलर्स से घूम-घूमकर वसूली की। जो कारोबारी पैसे देने से पीछे हटे, उनके खिलाफ कार्रवाई कराई गई। कस्टम मिलिंग का कमीशन रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के माध्यम से वसूला जाता था। इस काम की जिम्मेदारी रोशन चंद्राकर और शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया को सौंपी गई थी, जिन्होंने हर जिले में एजेंट नियुक्त किए।
वसूली की रकम को बीटीआई मैदान, पाम बैलेजियो और बनियान ट्री जैसे होटलों में लाया जाता था। हर बार पैसे छोड़ने की जगह बदल दी जाती थी। एजेंट वहां रकम छोड़ते और फिर यह राशि जेल रोड और शंकर नगर स्थित होटल में पहुंचाई जाती थी, जहां से टुटेजा तक जाती थी। इस कार्रवाई से कस्टम मिलिंग स्कैम की पूरी संपूर्ण संरचना और नेटवर्क उजागर होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। EOW अधिकारियों का कहना है कि आगामी पूछताछ और दस्तावेजी जांच से और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे पूरे स्कैम के सभी प्रमुख आरोपी और उनके सहयोगी कानून के दायरे में लाए जा सकेंगे। इस तरह छत्तीसगढ़ के कस्टम मिलिंग घोटाले में दीपेन चावड़ा की गिरफ्तारी और चालान पेश करना इस घोटाले में जुड़े बड़े नेटवर्क तक पहुंचने और अवैध धनराशि के ठोस सबूत सामने लाने में निर्णायक साबित होगा।
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