Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मामले के आरोपी और शराब निगम के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी उर्फ एपी त्रिपाठी को अब राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने रिमांड पर लिया है। ईओडब्ल्यू ने न्यायालय से आरोपी को 26 जुलाई तक पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कुछ दिन पहले एपी त्रिपाठी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा न्यायालय में पेश किया गया। इसी दौरान ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच के लिए आरोपी को अपनी हिरासत में लेने की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। अब ईओडब्ल्यू की टीम त्रिपाठी से ओवरटाइम भुगतान घोटाले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी।
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर में सीएसएमसीएल ओवरटाइम भुगतान घोटाला मामले में अपराध क्रमांक 44/2024 दर्ज किया गया है। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 और 120बी के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को 17 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी अब उनसे घोटाले की पूरी प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित आर्थिक लेनदेन को लेकर पूछताछ कर रही है।
मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई से हुई थी। ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के अधिकारियों ने 29 नवंबर 2023 को तीन व्यक्तियों से 28.80 लाख रुपये नगद बरामद किए थे। इस कार्रवाई की जानकारी छत्तीसगढ़ शासन को भेजी गई थी। इसके आधार पर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान ईओडब्ल्यू को जानकारी मिली कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच सीएसएमसीएल में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान, चार अतिरिक्त दिवस, बोनस और सर्विस चार्ज के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को बड़ी राशि का भुगतान किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस अवधि में मैनपावर एजेंसियों को 172 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया। आरोप है कि इस भुगतान में अनियमितता बरती गई और भुगतान की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर नगद कमीशन के रूप में सिंडिकेट द्वारा अर्जित किया गया। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में कई लोगों की भूमिका की पड़ताल की है। इस मामले में पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। अब पूर्व प्रबंध संचालक एपी त्रिपाठी की भूमिका को लेकर आगे की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया, मैनपावर एजेंसियों से संबंध, कथित कमीशन नेटवर्क और अन्य संबंधित मामलों पर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी रहेगी। शराब निगम के इस कथित घोटाले को लेकर प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा होती रही है। ईओडब्ल्यू और ईडी की संयुक्त जांच के बाद अब मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।