Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत पंचधार में शुक्रवार को जनगणना जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों को जनगणना प्रक्रिया और स्व-गणना प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने उपस्थित ग्रामीणों को जनगणना के महत्व को समझाते हुए स्व-गणना करने की अपील की और इसे सरल, सुरक्षित तथा समय बचाने वाली प्रक्रिया बताया।
कार्यशाला के दौरान कई ग्रामीणों ने मौके पर ही मोबाइल फोन के माध्यम से स्व-गणना प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान नागरिक महेश बारीक ने बताया कि यह प्रक्रिया बेहद आसान है और कुछ ही मिनटों में मोबाइल से पूरी की जा सकती है। वहीं पत्रकार हेमंत पटेल ने भी स्व-गणना पोर्टल पर जानकारी भरकर प्रक्रिया को समझा और ग्रामीणों को इसके उपयोग के बारे में बताया। कार्यक्रम में पटवारी, सचिव, सरपंच-उप सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और उन्होंने भी उत्साह के साथ डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के पहले चरण की तैयारी शुरू हो चुकी है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की सुविधा दी गई है, जबकि 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा। इसके बाद मुख्य जनगणना फरवरी 2027 से मार्च 2027 तक संपन्न होगी। अधिकारियों के अनुसार इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि डेटा अधिक सटीक और विश्वसनीय हो सके।
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने भी नागरिकों को स्व-गणना के लिए प्रेरित किया है और सभी से अपील की है कि वे आगे आकर अपनी जानकारी सही तरीके से दर्ज करें। प्रशासन ने बताया कि इच्छुक नागरिक https://se.census.gov.in/ पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने परिवार और घर की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना पूरी करने के बाद प्रत्येक परिवार को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे गणनाकर्मी के आने पर सत्यापन के लिए दिखाना आवश्यक होगा। इस डिजिटल जनगणना प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय मोबाइल या लैपटॉप से जानकारी भर सकते हैं। यह सुविधा 24x7 उपलब्ध है, जिससे लोग घर बैठे या बाहर रहते हुए भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करेंगे, जिससे डेटा अधिक सटीक होगा और योजनाओं के निर्माण में मदद मिलेगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग स्व-गणना नहीं कर पाएंगे, उनके लिए गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
इस प्रक्रिया में लगभग 33 प्रकार के प्रश्न शामिल होंगे, जिनमें घर की स्थिति, पेयजल, बिजली, शौचालय, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह सुविधा लाभकारी है जो पलायन पर रहते हैं या मई 2026 में घर पर उपलब्ध नहीं रहेंगे। वे देश के किसी भी स्थान से ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं और बाद में यूनिक आईडी दिखाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे किसी भी नागरिक को जनगणना से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। अधिकारियों ने कहा कि स्व-गणना एक वैकल्पिक सुविधा है, अनिवार्य नहीं। जो लोग ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पाएंगे, उनके लिए पारंपरिक प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। डिजिटल प्रणाली से न केवल प्रशासन का कार्य आसान होगा बल्कि जनगणना तेजी से और अधिक प्रभावी तरीके से पूरी हो सकेगी। इस तरह जनगणना 2027 की तैयारी के तहत चलाया जा रहा यह जागरूकता अभियान ग्रामीण स्तर तक लोगों को जोड़ने में सफल हो रहा है और डिजिटल भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।