बृजमोहन अग्रवाल का कांग्रेस पर हमला, CEC के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव राजनीति का परिणाम

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Update: 2026-03-13 18:08 GMT
Raipur. रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तीखा हमला किया है। उन्होंने इसे विपक्ष की “हताशा और निराशा” का नतीजा बताया। अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र और इसकी संस्थाओं में विश्वास रखने की बजाय विपक्ष लगातार उन्हें कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ सवाल उठाने के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और देश की जनता इन घटनाओं को बारीकी से देख रही है। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की यह राजनीति लंबे समय तक नहीं चलेगी। देश इन्हें कभी माफ नहीं करेगा। लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाले राजनीतिक कदम असफल होंगे।” अग्रवाल ने यह भी कहा कि विपक्ष केवल सत्तारूढ़ दल को निशाना बनाने के लिए इन संस्थाओं के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है। उनका मानना है कि चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थानों पर राजनीतिक दबाव बनाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि देश के लोग निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्थाओं पर भरोसा रखते हैं और ऐसी राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी चेतावनी दी कि लोकतंत्र के प्रति जनता की जागरूकता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का सम्मान ही भारत की लोकतांत्रिक ताकत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनता और राजनीतिक दल इस मामले में जिम्मेदारीपूर्वक सोचेंगे और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखने में सहयोग करेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विपक्ष के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाना सिर्फ विरोध करने की राजनीतिक रणनीति है, जबकि संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न उठाना लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत माना जा रहा है। अग्रवाल ने इसे लोकतंत्र की मजबूती और जनता के विश्वास की परीक्षा बताया। लोकसभा सांसद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश के संवैधानिक संस्थान लोकतंत्र की रीढ़ हैं। उन्हें बदनाम करने या कमजोर करने का प्रयास भारत की जनता को स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें और लोकतंत्र को मज़बूत बनाने में योगदान दें।
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