सत्ता से संगठन तक मुस्लिम चेहरों पर भरोसा छ.ग. में पहली बार, कांग्रेस क्यों हो रही बेचैन
राजस्व, पीएचई, डब्ल्यूआरडी, वित्त सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में प्रमुखों की भूमिका में मुस्लिम अधिकारी, 70 साल के इतिहास में पहली बार मुस्लमानों को इतने महत्वपूर्ण अधिकार
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ में बीजेपी शासन में बड़े पदों पर कई मुस्लिम अधिकारी काबिज हैं। मंत्रालय में आज भी बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम अधिकारी सेवाएं दे रहे हैं। भाजपा शासन ने कई मुस्लिम अधिकारियों पर भरोसा जताया है और वे अपेक्षानुसार रिजल्ट भी दे रहे हैं। भाजपा ने मुस्लिम प्रशासनिक अधिकारियों के आलावा राजनीतिक चेहरों की प्रमुख पदों पर नियुक्ति भी दी है। वैसे तो देश में सिविल सेवा के पदों पर नियुक्तियां यूपीएससी की मेरिट के आधार पर होती हैं, लेकिन नियुक्ति देना शासन के अधीन होता है। दूसरी बात राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर चयन सरकार या पार्टी नेतृत्व द्वारा किया जाता है। जिसमे मु यमंत्री और मंत्रियों की पसंद नापसंद महत्वपूर्ण होती है। इस बात पर गौर करे तो छत्तीसगढ़ में इनके पसंद के कई मुस्लिम अधिकारी उच्च पदों पर कार्यरत है।
देश के ब्यूरोक्रेट किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि भारत सरकार और राज्य कैडरों के अधीन काम करते हैं उनकी नियुक्ति में भी पसंद नापसंद देखा जाता है उस लिहाज से बेहतर रिजल्ट की अपेक्षा में कई बड़े पदों पर मुस्लिम अधिकारियो को नियुक्त किया गया है। वर्तमान में बीजेपी शासन के दौरान भी कई मुस्लिम अधिकारी केंद्र और राज्यों में वरिष्ठ और संवेदनशील पदों पर कार्यरत हैं। छत्तीसगढ़ से मुस्लिम अधिकारी आईएएस अयाज तांबोली डेपुटेशन में केंद्र सरकार के अधीन महत्वपूर्ण पद पर सेवा दे रहे हैं वही छत्तीसगढ़ में मंत्रालय से लेकर मैदानी क्षेत्रो में भी महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम अधिकारी बैठे हुए हैं।
छत्तीसगढ़ में कई मुस्लिम अधिकारी गृह, स्वास्थ्य, राजस्व, जिला मजिस्ट्रेट, थानेदार और जनसंपर्क जैसे विभागों में महत्वपूर्ण पदों का नेतृत्व कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कई ऐसे नाम हैं जो छत्तीसगढ़ में देखे जा सकते हैं।
शम्मी आबिदी (IAS): सचिव स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग सहित प्रशासनिक तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
मोहम्मद कैसर अब्दुलहक (IAS): पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग में सचिव पद की जि मेदारी संभाल रहे हैं।
तंबोली अय्याज फकीरभाई (IAS): मंत्रिमंडल सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इफ्फत आरा (IAS): आईएएस (IAS) इफ्फत आरा वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
आईए सिद्दीकी : छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग (CGWRD) में अपनी सेवाएं दी हैं।
शहला निगार (IAS): कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, कृषि विकास तथा किसान कल्याण विभाग जैसे प्रमुख महकमों की कमान संभाले हुए हैं।
मो. आरिफ : एयरपोर्ट डायरेक्टर रायपुर।
डॉ. फरीहा आलम (IAS): स्कूल शिक्षा और श्रम विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य कर रही हैं।
आरिफ एच. शेख (IPS): छत्तीसगढ़ कैडर के ढ्ढक्कस् अधिकारी हैं। वे रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और बलौदाबाजार सहित छत्तीसगढ़ के 8 जिलों में स्क्क) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के प्रमुख पुलिस थानों में मुस्लिम समुदाय के अधिकारी थाना प्रभारी के रूप में अपनी जि मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अलावा तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी मुस्लिम समुदाय के अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें रेना जमील (आईएएस), उ मेजा खातून अंसारी (आईएएस) और जे. ए. सिद्दीकी (जल संसाधन विभाग), सि मी नाहिद, इस्मत जहांदानी, नकवी, नसीम अहमद खान जैसे अधिकारियों सहित कई अधिकारियों के नाम उल्लेखनीय हैं। ये अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जि मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और जनसेवाओं के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सिर्फ शासन ही नहीं नहीं बल्कि पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम और संगठन में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में गठित राष्ट्रीय टीम में कई मुस्लिम चेहरे को शामिल किया गया है। जैसे कि नई टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के महत्वपूर्ण पद पर मुस्लिम नेता को रखा गया है। यही नहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र से आने वाले एक जमीनी मुस्लिम नेता को बीजेपी अल्पसं यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे अल्पसं यक समुदायों के बीच पार्टी की योजनाओं के विस्तार में मु य भूमिका निभा रहे हैं। ठीक इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम अधिकारी अपनी जि मेदारी निभा रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व शासनकाल को देखें तो वर्तमान में बीजेपी सरकारों द्वारा मुस्लिम नेताओं को कई उच्च पदों की जि मेदारी दी गई है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के पिछले कार्यकालों में भी कई मुस्लिम नेता मंत्री पद को सुशोभित भी कर चुके हैं। हालांकि राजनीतिक चर्चाओं में अक्सर यह मुद्दा भी उठाया जाता रहा है कि वर्तमान केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई भी मुस्लिम सांसद या कैबिनेट मंत्री शामिल नहीं है, जिसके कारण प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक स्तर पर बहस जारी रहती है। परन्तु हाल में ही भाजपा नेतृत्व ने पार्टी के उपाध्यक्ष और दूसरे पदों पर मुस्लिम नेताओं को नियुक्ति देकर आलोचनाओं को ख़ारिज कर दिया है। वैसे भी भाजपा के स्थापना के समय से ही सिकंदर ब त जैसे कई मुस्लिम चेहरे शामिल रहे।
प्रशासनिक पदों पर मुस्लिम अधिकारियों का दबदबा
भारत में सिविल सेवाओं में चयन यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोग की मेरिट के आधार पर होता है, लेकिन प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशीलता को देखते हुए महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति शासन द्वारा की जाती है। छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों और केंद्रीय विभागों में वरिष्ठ मुस्लिम अधिकारी अहम और नीतिगत जि मेदारियां संभाल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में राजस्व, जल संसाधन, वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुस्लिम अधिकारियों का होना भारतीय जनता पार्टी की सरकार में आश्चर्यचकित करता है। विपक्ष के लिए करारा जवाब।
राष्ट्रीय संगठन में मुस्लिम चेहरों को अहम कमान
हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने संगठन में बड़े बदलाव करते हुए मुस्लिम समुदाय के दिग्गज नेताओं को महत्वपूर्ण जि मेदारियां सौंपी हैं। प्रोफेसर तारिक मंसूर: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और शिक्षाविद प्रो. तारिक मंसूर को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा है। संगठन में उनकी मजबूत उपस्थिति अल्पसं यक समुदाय तक पार्टी की पहुंच को और पु ता कर रही है। कुंवर बासित अली उत्तर प्रदेश के मेरठ से ताल्लुक रखने वाले ज़मीनी नेता कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसं यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे लगातार जनहित योजनाओं और संगठन विस्तार के जरिए अल्पसं यक समाज को पार्टी से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
पूर्वाग्रहों और राजनीतिक आरोपों का करारा जवाब
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तक, कई प्रमुख मुस्लिम नेताओं को कैबिनेट और संवैधानिक पदों पर सर्वोच्च स मान दिया गया है। राजनीतिक दल भले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में सांसदों के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाते हों, लेकिन बीजेपी ने प्रशासनिक नियुक्तियों, आयोगों और संगठनात्मक पदों पर मुस्लिम चेहरों को नेतृत्व देकर यह साबित कर दिया है कि उसकी नीतियां पारदर्शी और कार्य-आधारित हैं।
प्रशासनिक सेवाओं में योग्यता और जि मेदारी अहम
भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्य सिविल सेवाओं में अधिकारियों का चयन निर्धारित प्रतियोगी परीक्षाओं और सेवा नियमों के तहत होता है। इसके बाद उनकी पदस्थापना, स्थानांतरण और अतिरिक्त प्रभार शासन के प्रशासनिक निर्णयों के अनुसार तय होते हैं। किसी अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन उसके विभागीय दायित्वों, प्रशासनिक फैसलों और कामकाज के परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसी तरह राजनीतिक संगठनों में प्रतिनिधित्व का आकलन केवल नियुक्तियों से नहीं, बल्कि संगठन में भागीदारी और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर किए गए काम से भी किया जा सकता है।