बिरनपुर हिंसा मामला: CBI ने कोर्ट में धारा बढ़ाने का लगाया आवेदन

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Update: 2025-11-13 14:33 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर गांव में 8 अप्रैल 2023 को हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में ढाई साल बाद सुनवाई की प्रक्रिया फिर तेज हो गई है। स्पेशल कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और बचाव पक्ष के बीच धारा बढ़ाए जाने को लेकर लंबी बहस हुई। सीबीआई ने कोर्ट में धारा बढ़ाने का आवेदन दायर करते हुए कहा कि जांच के दौरान छह नए आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनसे घटना से जुड़े कई नए तथ्य और परिस्थितियां उजागर हुई हैं। एजेंसी ने तर्क दिया कि इन तथ्यों के
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में मौजूदा धाराओं को और गंभीर अपराधों में परिवर्तित करने की आवश्यकता है। वहीं, बचाव पक्ष ने इस आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि धारा बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सीबीआई की चार्जशीट में पहले ही सभी तथ्यों का उल्लेख किया जा चुका है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि एजेंसी का यह कदम अनावश्यक और न्यायिक प्रक्रिया में देरी पैदा करने वाला है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सीबीआई के आवेदन पर अंतिम फैसला 19 नवंबर 2025 को सुनाया जाएगा।
क्या है बिरनपुर हिंसा मामला?
बिरनपुर हिंसा का सूत्रपात 8 अप्रैल 2023 को दो बच्चों के बीच हुई मामूली झड़प से हुआ था। यह झड़प धीरे-धीरे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा में बदल गई। हिंसा के दौरान साजा विधायक ईश्वर साहू के पुत्र भुनेश्वर साहू (22 वर्ष) की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। 10 अप्रैल 2023 को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। इसके बाद गांव में आगजनी और दो और हत्याएं हुईं। मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की हत्या कर दी गई। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी और करीब दो सप्ताह तक गांव में कर्फ्यू लागू रहा। प्रारंभिक जांच में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था। लेकिन बाद में राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया, जिसके बाद जांच एजेंसी ने अपनी जांच के दौरान 6 नए आरोपियों को चिन्हित किया है।
सीबीआई की चार्जशीट में बड़ा खुलासा
सीबीआई ने 30 सितंबर 2025 को अपनी चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। एजेंसी ने साफ किया कि बिरनपुर हिंसा किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं थी, जैसा कि विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है। चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि पूर्व विधायक अंजोर यदु का नाम इस मामले में नहीं पाया गया, जबकि मृतक भुनेश्वर साहू के पिता ईश्वर साहू लगातार उनके नाम को लेकर संदेह व्यक्त करते रहे थे। जांच एजेंसी ने अप्रैल 2024 में बिरनपुर का दोबारा दौरा किया था और स्थानीय गवाहों से पूछताछ, घटनास्थल का निरीक्षण और पुराने सबूतों की वैज्ञानिक जांच शुरू की थी। इन प्रक्रियाओं के बाद एजेंसी को कई नए तथ्य मिले, जिसके आधार पर छह नए आरोपियों को शामिल किया गया और अतिरिक्त धाराओं का प्रस्ताव रखा गया।
कोर्ट में आगे की प्रक्रिया
सीबीआई के आवेदन पर अब कोर्ट 19 नवंबर 2025 को फैसला सुनाएगा कि क्या आरोपियों पर लगाई गई धाराओं में कठोर धाराएं जोड़ी जाएंगी या नहीं। यदि कोर्ट एजेंसी के पक्ष में फैसला देता है, तो इस मामले की सुनवाई अगले चरण में तेजी से आगे बढ़ेगी। इस बीच, साजा विधायक ईश्वर साहू ने कहा है कि वह अपने बेटे भुनेश्वर को न्याय दिलाने के लिए अंत तक संघर्ष करेंगे। वहीं, सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जांच अब अपने अंतिम चरण में है और एजेंसी पूरे घटनाक्रम को कानूनी रूप से मजबूत बनाने में जुटी है। बिरनपुर हिंसा को छत्तीसगढ़ की हालिया इतिहास की सबसे संवेदनशील और जटिल साम्प्रदायिक घटनाओं में से एक माना जाता है। इस मामले ने प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब जब यह मामला फिर से कोर्ट में सक्रिय हुआ है, तो प्रदेश की निगाहें आने वाले 19 नवंबर के फैसले पर टिकी हैं।
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