BIG BREAKING: मंत्रिमंडल विस्तार से पहले डॉ. रमन सिंह दिल्ली रवाना

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Update: 2025-08-18 17:48 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चरम पर है। लंबे समय से टलते आ रहे कैबिनेट विस्तार पर अब हर दिन नए संकेत और नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। बीजेपी खेमे में बेचैनी साफ दिखने लगी है। सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह रविवार शाम दिल्ली रवाना हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी उनकी बैठक होने की संभावना है। डॉ. रमन सिंह चाहते हैं कि नवा रायपुर में बने नए विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों राज्योत्सव (1 नवंबर) के अवसर पर कराया जाए। माना जा रहा है कि इसी सिलसिले में उनका दिल्ली दौरा अहम है। हालांकि, इस दौरे के पीछे मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़ी संभावनाओं को भी जोड़कर देखा जा रहा है।

राजभवन में अचानक मुलाकात, तेज हुई सियासी चर्चा
मंत्रिमंडल विस्तार की गहमागहमी के बीच सोमवार शाम एक नया घटनाक्रम हुआ। मंत्री पद के प्रबल दावेदार बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल और वरिष्ठ नेता पुरंदर मिश्रा ने राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात की। दोनों नेताओं के अचानक राजभवन पहुंचने से सियासी गलियारों में हलचल मच गई। हालांकि, अमर अग्रवाल ने इसे महज शिष्टाचार मुलाकात बताते हुए राजनीतिक अटकलों से इनकार किया, लेकिन दोनों नेताओं की मौजूदगी और समय ने राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी। भाजपा खेमे में इसे कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।

तीन नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही
भाजपा संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विस्तार में इस बार तीन नए चेहरों को मंत्री बनाया जाएगा। इसमें सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि एक सामान्य वर्ग, एक अनुसूचित जनजाति और एक पिछड़ा वर्ग से नेता मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग संभाग से एक-एक नेता को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। संगठन का मानना है कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल नहीं होगा और किसी को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाएगा।

संसदीय सचिवों की नियुक्ति भी एजेंडे पर
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर भी भाजपा सरकार सक्रिय हो गई है। अगस्त महीने में ही इन पदों पर नियुक्ति किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह वही परंपरा है, जिसे डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में शुरू किया गया था। वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार भी संसदीय सचिवों और निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इससे पार्टी संगठन के भीतर असंतोष कम करने और अधिक से अधिक विधायकों को जिम्मेदारी देने का संदेश जाएगा।

दिल्ली से लेकर रायपुर तक गहमागहमी
दिल्ली में रमन सिंह की सक्रियता और रायपुर में विधायकों-नेताओं की राज्यपाल से मुलाकातें यह दर्शाती हैं कि अगले कुछ दिनों में बड़ा फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि 19 अगस्त को कैबिनेट विस्तार संभव नहीं है, लेकिन 20 अगस्त को इस दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता है। वहीं, सूत्रों का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 19 अगस्त को कैबिनेट बैठक और कलेक्टरों से VC करने वाले हैं। ऐसे में 20 अगस्त को शपथ ग्रहण की संभावना अधिक प्रबल है।

नए चेहरों को लेकर मंथन जारी
भाजपा खेमे में जिन नामों पर चर्चा चल रही है, उनमें बिलासपुर के अमर अग्रवाल सबसे आगे हैं। वहीं, दुर्ग से गजेन्द्र यादव का नाम भी मंत्री पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। सरगुजा से एक आदिवासी चेहरा शामिल करने की संभावना प्रबल है। सूत्रों के मुताबिक संगठन ने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर नामों की सूची तैयार कर ली है, जिस पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगनी है। मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा सरकार का मकसद सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बढ़ाना और 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना है। पार्टी चाहती है कि हर क्षेत्र और वर्ग को प्रतिनिधित्व मिले ताकि किसी तरह की नाराजगी न रहे। इसके अलावा संसदीय सचिवों और निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति से उन विधायकों को भी संतुष्ट किया जाएगा, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाएगी।
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