गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व पर भंडारा कार्यक्रम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल हुए शामिल

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Update: 2025-11-09 14:45 GMT
Raipur. रायपुर। गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर रविवार को राजधानी रायपुर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में आयोजित विशाल भंडारा एवं सेवा कार्यक्रम में शामिल होकर गुरु नानक देव जी के चरणों में नमन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक संगठन और युवा उपस्थित रहे। भक्ति संगीत और ‘सतनाम वाहेगुरु’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
सांसद बृजमोहन
अग्रवाल ने गुरु नानक देव जी के उपदेशों को मानव जीवन के लिए अमूल्य बताया और कहा कि “गुरु नानक देव जी ने हमें सिखाया कि सच्चा जीवन सेवा, सत्य और प्रेम पर आधारित होता है। गुरु ने कहा था। ‘गुरु ही परमात्मा का साक्षात रूप है’, और गुरु ग्रंथ साहिब को ही सद्गुरु मानकर उन्होंने विश्व को आध्यात्मिकता की नई दिशा दी।” उन्होंने आगे कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी अंधकार में प्रकाश फैलाती हैं।

उनका संदेश ‘नाम जपो, किरत करो, वंड छको’ समाज को समरसता और मानवता की ओर ले जाता है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि गुरु नानक देव जी का जीवन हमें सिखाता है कि सेवा ही सबसे बड़ी उपासना है, और दूसरों के दुख को दूर करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। कार्यक्रम में सिंधी समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सांसद अग्रवाल का स्वागत पुष्पगुच्छ और शॉल से किया। भंडारे में आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन और प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु नानक देव जी के भजन गाए और उनके उपदेशों को याद करते हुए समाज में प्रेम, भाईचारे और शांति का संदेश दिया। इस अवसर पर सांसद अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में सदैव ‘सबका साथ, सबका सम्मान और सबका कल्याण’ की भावना रही है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आत्मसात कर हम समाज को और अधिक संवेदनशील, सशक्त और एकजुट बना सकते हैं। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, पूज्य सिंधी पंचायत और आयोजन समिति के सभी सदस्यों को इस भव्य आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने प्रदेशवासियों को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए कहा- “गुरु की वाणी हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर और स्वार्थ से सेवा की ओर ले जाती है।”
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