Mungeli. मुंगेली। पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद के शासकीय बैंक खाते से 26 लाख 87 हजार रुपये के कथित अनधिकृत लेन-देन के मामले में सिटी कोतवाली मुंगेली पुलिस ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक तत्कालीन लिपिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी टिकेश कुमार को 23 सितंबर 2026 को गिरफ्तार करने के बाद 24 सितंबर को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस मामले में अन्य तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, कलेक्टर मुंगेली के आदेश के आधार पर पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद के शासकीय खाते क्रमांक 3742452827 से संबंधित कथित अनधिकृत लेन-देन की जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश मिले थे। यह खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में संचालित था। सिटी कोतवाली पुलिस ने प्रारंभिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद अपराध क्रमांक 253/2026 दर्ज कर बीएनएस की धारा 318(4) के तहत विवेचना शुरू की। जांच आगे बढ़ने के बाद आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(5) भी जोड़ी गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शासकीय राशि से जुड़े लेन-देन की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत शुक्ला और पुलिस अनुविभागीय अधिकारी आशीष अरोरा के मार्गदर्शन में सिटी कोतवाली पुलिस ने संबंधित बैंक खाते, ट्रांजेक्शन विवरण, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि 30 सितंबर 2025 से 8 अक्टूबर 2025 के बीच पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद के शासकीय खाते से कुल सात बार कथित अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए गए। इन लेन-देन में कुल 26 लाख 87 हजार रुपये की राशि का आहरण और पुनः जमा करते हुए अनियमित लेन-देन किए जाने की बात सामने आई।
जांच के दौरान पुलिस ने टिकेश कुमार पिता स्व. रैन सिंह, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम खैरवाही, थाना चारामा, जिला कांकेर, हाल निवासी हांडीपारा, तात्यापारा चौक रायपुर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, आरोपी संबंधित अवधि में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में क्लर्क के पद पर कार्यरत था। वह 29 अगस्त 2022 से 27 जनवरी 2026 तक इस शाखा में पदस्थ रहा। बैंक में आरोपी को ग्राहक KYC, मोबाइल नंबर लिंकिंग, खाता संचालन, NEFT-RTGS और राशि अंतरण सहित अन्य बैंकिंग कार्यों की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस के अनुसार, बैंक मैनेजर के निर्देश पर पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद के बंद शासकीय खाते को दोबारा सक्रिय किया गया था।
जांच में सामने आया कि 30 सितंबर 2025 को इस शासकीय खाते से आरोपी के व्यक्तिगत बैंक खाते में 8 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 1 अक्टूबर 2025 को मंजुलता पटेल के बैंक खाते में क्रमशः 9 लाख 19 हजार और 9 लाख 18 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 26 लाख 87 हजार रुपये के अंतरण की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक, इसमें से 1 लाख 61 हजार 500 रुपये अधिक राशि होने के कारण शासन के खाते में वापस हो गए थे।
आरोपी ने अपने कथन में राशि का अंतरण बैंक मैनेजर के अनुमोदन के बाद CBS प्रणाली के माध्यम से किए जाने की बात कही है। पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, CBS विवरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के आधार पर आरोपी की प्रथम दृष्टया भूमिका पाए जाने की बात कही है। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना अभी जारी है। कार्रवाई में निरीक्षक कार्तिकेश्वर जांगड़े, सहायक उप निरीक्षक ईश्वर सिंह राजपूत, आरक्षक विकास ठाकुर, योगेश यादव और मनोज टण्डन की भूमिका रही।
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